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‘कागजों पर नियम, जमीन पर मौत’: अग्निकांडों को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे वकील, पूरे देश में सेफ्टी ऑडिट की मांग

देश भर में बार-बार हो रहे भीषण अग्निकांडों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है. वकील नरेंद्र गोस्वामी द्वारा दायर इस याचिका में मांग की गई है कि देश के सभी कोचिंग, अस्पताल और मॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर एक समान ‘फायर सेफ्टी कानून’ अनिवार्य किया जाए.

Fire Safety PIL In Supreme Court Demands Uniform Law Across India
Edited by Vaibhav Gupta

Fire Safety PIL: देश मे बार-बार होने वाली भीषण अग्निकांड को लेकर देशभर में एक समान फायर सेफ्टी कानून लागू करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. यह जनहित याचिका अधिवक्ता नरेंद्र गोस्वामी ने दायर की है.

जीवन सुरक्षा अनुपालन तैयार करने की मांग

दायर जनहित याचिका में केंद्र सरकार से एक समय सीमा के भीतर राष्ट्रीय न्यूनतम अग्नि एवं जीवन सुरक्षा अनुपालन तैयार करने के निर्देश देने की मांग की गई है. जनहित याचिका में कहा गया है कि यह ढांचा देशभर के सभी उच्च जोखिम वाले सार्वजनिक परिसरों पर अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग की गई है.

इनमें स्कूल, कोचिंग सेंटर, ट्यूशन सेंटर, छात्रावास, पीजी, होटल, गेस्ट हाउस, रेस्तरां, बैंक्वेट हॉल, मैरिज हॉल, गेमिंग जोन, मॉल, सिनेमा हॉल, अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक ओर अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठान शामिल है.

सरकारी लापरवाही और निजी संस्थानों की अनदेखी

दायर याचिका में कहा गया है कि उपहार सिनेमा अग्निकांड, एएमआरआई अस्पताल हादसा, राजकोट गेमिंग जोन हादसा, दिल्ली कोचिंग सेंटर बेसमेंट त्रासदी, सूरत कोचिंग सेंटर आग, दिल्ली मालवीय नगर गेस्ट हाउस अग्निकांड और हाल में लखनऊ कोचिंग सेंटर आग जैसी घटनाएं यह साबित करती हैं कि सरकारी लापरवाही और निजी संस्थानों की अनदेखी के कारण निर्दोष नागरिक अपनी जान गंवा रहे है. 90 से 120 दिनों के भीतर सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश देने की मांग की गई है.

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे जिला स्तर पर सभी उच्च जोखिम वाले परिसरों का पूरा विवरण हलफनामे के माध्यम से कोर्ट ने दाखिल करने की मांग की गई है.

दिल्ली और लखनऊ का विशेष उल्लेख

याचिका में कहा गया है कि भारत में बार-बार छात्रों, मरीजों और आम लोगों की मौत हो रही है, लेकिन हर हादसे के बाद केवल मुआवजे की घोषणा, एफआईआर, जांच समिति और कुछ अधिकारियों के निलंबन तक कार्रवाई सीमित रह जाती है और अगली त्रासदी का इंतजार शुरू हो जाता है. दिल्ली और लखनऊ की घटनाओं का विशेष तौर पर उल्लेख किया गया है.

दायर याचिका में ये भी कहा गया है कि देश मे फायर सेफ्टी से जुड़े नियम और मानक कागजों पर तो मौजूद है, लेकिन उनका पालन सही तरीके से नही हो रहा है. याचिका में 3 जून 2026 को मालवीय नगर स्थित एक गेस्ट हाउस में आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई थी. जबकि 22 जून 2026 को लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग सेंटर में लगी आग से 15 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमे अधिकांश छात्र है.

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-भारत एक्सप्रेस



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