सोशल मीडिया पर फैलने वाली फर्जी खबरों, भ्रामक सामग्री सहित अन्य कंटेंट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है. यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील विशाल तिवारी न दायर की है. दायर जनहित याचिका में सोशल मीडिया पर फैलने वाली फर्जी खबरों, भ्रामक सामग्री, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट तथा न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं की छवि खराब करने वाले कंटेंट पर रोक लगाने की.मांग की गई है.
दायर याचिका में कहा गया है कि 370 रुपए की बिरयानी विवाद और स्टैंड-अप कॉमेडी शो का हवाला दिया गया है. याचिका में सोशल मीडिया, ओटीटी कंटेंट व स्टैंड-अप कॉमेडी शो के.सीमा निर्धारित करने के लिए न्यायिक आयोग के गठन की मांग की गई है. इसके अलावा दायर याचिका में एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार द्वारा की गई असंवेदनशील टिप्पणियों पर अदालत का ध्यान आकर्षित किया गया है.
इसके अलावा शो के अन्य सेगमेंट में गुरुग्राम के एक युवक हिमांशु जांगड़ा का यह कहना कि उसने अपनी प्रेमिका को प्रायोजित बिरयानी के 370 रुपए वसूलने के लिए शारीरिक अंतरंगता की उम्मीद की थी.
दायर याचिका में कहा गया है कि हाल के.वर्षो में सोशल मीडिया पर न्यायाधीशों से जुड़े भ्रामक वीडियों, महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुचाने वाली वायरल सामग्री और बच्चों पर सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव जैसी घटनाओं ने दिखाया है कि मौजूदा कानून पर्याप्त नही है.
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में विशेष समिति के गठन की मांग
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक समिति का गठन की जाए, जो सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत सूचनाओं, एआई और डीपफेक, बच्चों की सुरक्षा, आयु सत्यापन, डिजिटल साक्षरता और जिम्मेदार डिजिटल संचार के लिए व्यापक दिशा निर्देश तैयार करें. साथ ही सरकार को मौजूदा आईटी कानूनों और नियमों की समीक्षा कर उन्हें समयानुकूल बनाने के निर्देश देने की मांग की गई है. आईटी अधिनियम 2000 और आईटी नियम 2021 की समीक्षा कर उन्हें आधुनिक तकनीक और एआई के अनुरूप मजबूत बनाने की मांग की गई है.
इसके साथ ही दायर याचिका में यह भी मांग की गई है कि संविधान में अनुच्छेद 19(1,(a) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, लेकिन अनुच्छेद 19 (2) के तहत इस स्वतंत्रता पर गरिमा, शालीनता, मानहानि और न्यायालय की अवमानना जैसे आधारों पर युक्तिसंगत प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं. इसलिए डिजिटल के जमाने में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक उत्तरदायित्व के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए नए संवैधानिक सिद्धांत को विकसित किया जाना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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