दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) से ब्लू स्मार्ट मोबिलिटी के पूर्व डायरेक्टर इंदरप्रीत सिंह वाधवा को फिलहाल राहत मिल गई है. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने वाधवा के खिलाफ जारी लुकआउट सर्कुलर को निलंबित कर दिया है.
25 करोड़ की शियोरिटी करें जमा- कोर्ट
कोर्ट ने इसके लिए वाधवा को 25 करोड़ रुपए की शियोरिटी और परिवार के किसी एक सदस्य को 5 करोड़ रुपए की शियोरिटी जमा करने का निर्देश दिया है. इसके अलावे उन्हें जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने, अपनी यात्रा योजना, मोबाइल नंबर, ईमेल पता और स्विट्जरलैंड का आवासीय पता अधिकारियों को उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं.
वाधवा के खिलाफ मई में एलओसी जारी किया गया था. उनपर Gensol Group से जुड़े 2385 करोड़ रुपए के कथित घोटाले का आरोप है. वह अमेरिकी नागरिक हैं और फिलहाल स्विट्जरलैंड में रहते है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी विदेशी नागरिक को बिना दोष सिद्ध हुए अनिश्चितकाल के लिए भारत में रोक कर नही रखा जा सकता है.
वित्तीय गड़बड़ियां के लिए दूसरी कंपनी को दिया ऑर्डर
मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि एलओसी वैध है और वाधवा को देश छोड़ने से रोकना जरूरी था, ताकि वे जांच से बच न सकें. वहीं सुनवाई के दौरान वाधवा की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि वे केवल ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी (BlueSmart Mobility) के स्वतंत्र निदेशक थे. वो न तो कंपनी के वित्तीय निर्णयों में शामिल थे, न ही संचालन में.
उन्होंने यह भी कहा कि ब्लूस्मार्ट और Gensol अलग-अलग कंपनियां है, जिनके केवल साझा प्रमोटर हैं और उन्होंने खुद व्हिसलब्लोअर की भूमिका निभाई है. इसी साल अप्रैल में सेबी ने इलेक्ट्रिक व्हीकल टैक्सी बुकिंग सर्विस ब्लूस्मार्ट के फाउंडर्स के खिलाफ एक अंतरिम ऑर्डर जारी किया था. यह ऑर्डर उनकी अपनी दूसरी कंपनी Gensol इंजीनियरिंग में फाइनेंशियल गड़बड़ियां करने के लिए दिया गया.
डायवर्जन सहित तोड़े कई नियम
अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी ने ब्लूस्मार्ट को मिलकर शुरू किया और फिर Gensol की शुरुआत की. सेबी ने पाया कि उन्होंने फंड का गलत इस्तेमाल और डायवर्जन सहित कई नियम तोड़े हैं. सेबी ने जग्गी भाइयों को सिक्योरिटीज मार्केट में एंट्री करने और Gensol में डायरेक्टर का पद या कोई और अहम मैनेजर का पद संभालने से बैन कर दिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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