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करुर भगदड़ मामले पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख, कहा– मद्रास हाईकोर्ट की कार्यवाही में कुछ तो गड़बड़ है

करुर में हुई भगदड़ की घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट की प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि पूरे मामले में कुछ न कुछ गड़बड़ जरूर है, जिसे सामने लाना जरूरी है.

Karur Stampede Case
Edited by Radha Priya

Karur Stampede Case: तमिलनाडु के करूर में हुई भगदड़ के मामले में के के रमेश नामक व्यक्ति की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. साथ ही कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को जवाबी हकफनामा दाखिल करने के लिए आठ सप्ताह का समय दे दिया है.

जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा भेजी गई रिपोर्ट को देखने के बाद कहा कि हाई कोर्ट में कुछ गड़बड़ है. कोर्ट ने कहा हाई कोर्ट में कुछ गलत हो रहा है, हाई कोर्ट में जो हो रहा है वह सही नही हो रहा है. रजिस्ट्रार जनरल ने एक रिपोर्ट भेजी है. साथ ही कोर्ट ने इस मामले में अपने फैसले में बदलाव करने से इनकार कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने ‘मूल निवासी’ शब्द हटाने से किया इनकार

दरअसल सीबीआई जांच का आदेश देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैरा 33 में मूल निवासी शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताई थी. जिसमें कोर्ट ने संशोधन करने से इनकार कर दिया है. इससे पहले कोर्ट ने पूर्व जज अजय रस्तोगी को समिति का प्रमुख नियुक्त किया था, जो सीबीआई जांच की निगरानी करेगी. अभिनेता विजय की रैली के दौरान अचानक भगदड़ मच गई थी. इस भगदड़ में 41 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 60 से अधिक लोग घायल हो गए थे.

हाईकोर्ट ने भगदड़ पर उठाए सवाल

यह याचिका बीजेपी नेता उमा आनंदन की ओर से दायर की गई थी. मद्रास हाईकोर्ट ने कहा था कि एक इंसान होने के नाते, मैं इन मौतों पर शोक व्यक्त करता हूं. एक न्यायाधीश होने के नाते, इतनी सारी जानें जाते देखना बहुत कष्टदायक है. उन्होंने कहा था आपने क्या कार्रवाई की? आपने ऐसा होने दिया, और अब कहते हैं कि केवल दो लोगों को गिरफ्तार किया गया, इसके लिए कौन जिम्मेदार है? हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा था कि इस घातक घटना के संबंध में कई सवाल हैं, जिसमें संभावित आधिकारिक उदासीनता भी शामिल हैं.

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– भारत एक्सप्रेस



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