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लखीमपुर खीरी मामला में सुप्रीम कोर्ट सख्त, ट्रायल जज के खिलाफ जांच तेज करने का दिया निर्देश

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को ट्रायल जज के खिलाफ जांच तेज करने और UP सरकार को नया पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का निर्देश दिया है.

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Edited by Vaibhav Gupta

Lakhimpur Kheri Violence Case: लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट को निचली अदालत के पीठासीन न्यायाधीश के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया है.

इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस संवेदनशील मामले में नया पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का भी आदेश दिया है. CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है.

‘जज का आचरण चौंकाने वाला’: प्रशांत भूषण

पीड़ितों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सुनवाई के दौरान निचली अदालत के जज की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा, ‘ट्रायल कोर्ट के जज जिस तरह से काम कर रहे हैं, वह बेहद परेशान करने वाला है और किसी भी संवेदनशील जज की अंतरात्मा को झकझोर देगा. उन्होंने न केवल इस मामले में, बल्कि कई अन्य मामलों में भी चौंकाने वाले फैसले लिए हैं. उन्होंने एनडीपीएस (NDPS) के मामलों को खुद अपने पास ट्रांसफर किया और उनमें आरोपियों को जमानत दे दी.’

प्रशांत भूषण ने जज की मनमानी का उदाहरण देते हुए आगे कहा कि गवाहों द्वारा बीमारी की मेडिकल पर्ची जमा करने के बावजूद उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिए गए. वहीं, अगली ही तारीख पर अगले चरण की गवाही के लिए तीन नए गवाहों को बुला लिया गया. उन्होंने कहा कि न्याय प्रक्रिया में इस तरह की मनमानी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती.

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से मांगी गई सीलबंद रिपोर्ट

आपको बता दें कि इससे पहले 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी हिंसा मुकदमे की धीमी रफ्तार और सुनवाई के तौर-तरीकों पर सख्त चिंता जताई थी. शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दिया था कि वे संबंधित जज के आचरण की जांच कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएं और अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपें.

वर्ष 2021 के इस चर्चित लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी और नए पब्लिक प्रॉसिक्यूटर की नियुक्ति के आदेश से अब निचली अदालत में मुकदमे की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

यह भी पढ़ें: 500 करोड़ के ट्रस्ट और पॉक्सो मामले के आरोपों पर घिरे सौरभ भारद्वाज, 10 अक्टूबर को आएगा कोर्ट का निर्णय

-भारत एक्सप्रेस



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