अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरी आत्महत्या मामले में कथित आरोपी आद्या प्रसाद तिवारी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दिया है. साथ ही कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2025 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष ने 150 गवाहों से पूछताछ करने का प्रस्ताव रखा था. लेकिन इस मामले में अभी तक मात्र तीन गवाहों की ही गवाही हो पाई है.
ऐसे में ट्रायल पूरा होने में काफी समय लगेगा, और आद्या तिवारी इस मामले में मुख्य आरोपी नही है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने आनंद गिरी को राहत देने से इनकार कर दिया था. आनंद गिरी ने 9 सितंबर 2022 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें उन्होंने जमानत देने से इनकार कर दिया था.
सुसाइड नोट पर गंभीर सवाल
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा था कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है. उसने दावा किया था कि कथित सुसाइड नोट में आनंद गिरी के नाम का उल्लेख किया गया था. वह नरेंद्र गिरी का नही था और इसमें कई कटिंग और ओवरराइटिंग थी. बता दें कि महंत नरेंद्र गिरी की आत्महत्या मामले में उनके शिष्य आनंद गिरी समेत तीन लोग जेल में बंद है.
इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी. जांच के बाद आनंद गिरी, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी पर नरेंद्र गिरी को ब्लैक मेलकर आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आरोप है.
सीबीआई इस मामले में आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है. बता दें कि प्रयागराज के जार्ज टाउन थाने में 2021 में महंत गिरी की आत्महत्या मामले में आद्या तिवारी पर मुकदमा दर्ज किया था. उस पर आत्महत्या के लिए उकसाने और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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