भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी महेश राउत को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है. कोर्ट ने महेश राउत को मेडिकल ग्राउंड पर छह सप्ताह के लिए अंतरिम जमानत दे दिया है. जस्टिस एम. एम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने यह आदेश दिया है.
एनआईए द्वारा दिए गए सबूत थे अफवाह
सुनवाई के दौरान जस्टिस एम. एम सुंदरेश ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक अंग्रेजी फिल्म में एक कहावत है, अगर आप एक व्यक्ति को मारते हैं, तो आप हत्यारे हैं, लेकिन अगर आप हजार लोगों को मारते हैं, तो आप विजेता हैं, बस यही अंतर है.
बता दें कि 33 वर्षीय कार्यकर्ता महेश राउज को निचली अदालत से जमानत मिल गई थी. लेकिन बाद में रद्द कर दिया गया. कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा था कि एनआईए ने उनके खिलाफ जो सबूत पेश किए, वो अफवाह थे. उनकी पुष्टि नही हो पाई.
आतंकी गतिविधि के लिए नहीं ठहराया गया जिम्मेदार
कोर्ट ने कहा था कि राउत को कुछ हद तक, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ( माओवादी) का सदस्य कहा जा सकता है. लेकिन किसी आतंकी गतिविधि के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है. कोर्ट ने कहा था कि एनआईए यह साबित नही कर सकी कि वह प्रतिबंधित संगठन में लोगों की भर्ती करने में शामिल थे. राउत को जून 2018 में गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वह मुंबई के बाहरी इलाके में स्थित तलोजा जेल में बंद है.
मामला दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एलगार परिषद से संबंधित है. पुणे पुलिस के अनुसार माओवादियों ने इस सम्मेलन का आयोजन किया था. पुलिस ने आरोप लगाया था कि सम्मेलन में दिए गए भड़काऊ भाषणों के कारण अगले दिन पुणे में कोरेगांव- भीमा युद्ध स्मारक पर हिंसा हुई.
ये भी पढ़ें: कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के खिलाफ 2014 के विवादित बयान मामले में पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई टली
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
