आतंकवादियों को छुड़ाने के लिए चार विदेशियों का अपहरण करने के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे आरोपी नासिर मोहम्मद सोदोजी उर्फ आफताफ अहमद को दिल्ली हाईकोर्ट से झटका लगा है. जस्टिस संजीव नरूला ने समयपूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. साथ ही कोर्ट ने सजा समीक्षा बोर्ड (एसआरबी) के आदेश को बरकरार रखा है. अभियुक्त अहमद को वर्ष 2002 में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2003 में उसकी सजा को उम्रकैद करावास में बदल दिया था. उसने 25 साल जेल में बिताने के बाद सरकार के नीति के तहत समय पूर्व रिहाई के लिए एसआरबी को आवेदन दिया था जिसे रद्द कर दिया गया था.
संप्रभुता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
अहमद ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. अदालत ने एसआरबी के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि विदेशी नागरिकों के अपहरण भारत की संप्रभुता के विरुद्ध एक खतरा पैदा करने के लिए की गई थी, जिसके अंतर्राष्ट्रीय परिणाम होते हैं. यह न केवल घरेलू सुरक्षा को कमज़ोर किया, बल्कि वि समुदाय के समक्ष भारत की प्रतिष्ठा को भी धूमिल किया. उसका संबंध उग्रवादी संगठन – हरकत-उल-अंसार के अहमद उमर सईद शेख से था जिसे कंधार विमान अपहरण होने के बाद रिहा किया गया था.
उसे अगर रिहा किया जाता है तो वह देश के प्रति शत्रुतापूर्ण नेटवर्क या सहानुभूति को फिर से जगा सकता है. उसके खिलाफ अपराध बहुत गंभीर हैं. वह समयपूर्व रिहाई की मांग अधिकार के तौर पर नहीं कर सकता. छूट में समाज कल्याण प्रमुख कारक है. उन्होंने यह कहते हुए अभियुक्त की याचिका खारिज कर दी.
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-भारत एक्सप्रेस
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