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देशभर में लंबित मुकदमों के निपटारे के लिए 90 दिनों का मध्यस्थता अभियान 1 जुलाई से शुरू

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता समिति 1 जुलाई से 90 दिन का राष्ट्रव्यापी मध्यस्थता अभियान शुरू कर रही हैं, जिसमें वैवाहिक विवाद, चेक बाउंस, उपभोक्ता विवाद सहित कई मामलों का निपटारा तेजी से किया जाएगा.

supreme court

देश भर की अदालतों में लंबित मुकदमों को निपटारे के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति (एमसीपीसी) एक जुलाई से 90 दिनों का मध्यस्थता अभियान शुरू करने जा रहा है. जो 30 सितंबर 2025 तक जारी रहेगा. नालसा ने हाल ही में एक विज्ञप्ति जारी कर इसकी जानकारी दी है.

नालसा द्वारा जारी विज्ञप्ति में मुताबिक देशभर में राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान शुरू किया जा रहा है, ताकि लंबित मामलों का निपटारा किया जा सके. मध्यस्थता के लिए लंबित मामलों में वैवाहिक विवाद, दुर्घटना दावे, घरेलू हिंसा, चेक बाउंस, वाणिज्यिक विवाद, सेवा मामले, आपराधिक समझौते योग्य मामले, उपभोक्ता विवाद और बेदखली शामिल है.

सप्ताह में सात दिन चलेगा अभियान

इस अभियान का मकसद यह है कि लोगों को यह विश्वास दिलाया जा सके कि विवाद समाधान के लिए मध्यस्थता एक ऐसा तंत्र है जो लोगों के लिए अनुकूल है. इससे पैसे की बचत तो होगी ही, रिश्तों को भी बचाया जा सकता है. यह मध्यस्थता अभियान सप्ताह में 7 दिन जारी रहेगा. इसमें पक्षकारों की.सुविधा का भी ध्यान रखा जाएगा, ताकि इस अभियान को सफल बनाया जा सके.

पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव के. सी कौशिक ने कहा कि नालसा और एमसीपीसी द्वारा शुरू किए जा रहे मध्यस्थता अभियान एक अच्छा प्रयास है. इससे देश भर के अदालतों लंबित मुकदमों की संख्या में कमी देखने को मिलेगी. यह अभियान निचली अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में चलना चाहिए.

उन्होंने कहा कि मध्यस्थता से दोनों पार्टी की सुविधा के हिसाब से फैसला होता है. जिसकी अपील फाइल होने की उम्मीद बहुत कम होती है. वही सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एम एल लाहोटी ने कहा कि इस तरह के अभियान चलाना जरूरी है. अगर लंबित मुकदमों की.संख्या में कमी नही आने से अदालत के चक्कर काटने वाले मुवक्किल को निराशा होती है.

उन्होंने कहा कि चेक बाउंस के मामले में संबंधित व्यक्ति अदालत इस उम्मीद के साथ जाता है कि अदालत 2 या 4 महीने में अपना फैसला सुना देगी और उसको पैसा मिल जाएगा, लेकिन ऐसा देखा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी चेक बाउंस के मामले को निपटारा करने में सालों साल लग जाता है. इसलिए निचली अदालतों में जो मुकदमें लंबित है. उसको कम कराना जरूरी है.

5.2 करोड़ से ज्यादा मुकदमे अदालतों में पेंडिंग

उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के वकीलों को सुनवाई टालने के लिए एक बार मौका देना चाहिए, बार-बार मौका देने से लंबित मुकदमों की संख्या में कमी नही आएगी. बता दें कि देशभर की अदालतों में 5.2 करोड़ से ज्यादा मुकदमा लंबित है. इसमें से 60 लाख ऐसे मामले है जो 10 साल से अधिक समय से लंबित है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट में 11.3 लाख मामले लंबित हैं. वही राजस्थान हाई कोर्ट में 6.8 लाख, महाराष्ट्र हाई कोर्ट में 6.6 लाख और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 4.8 लाख मुकदमे लंबित है. हालांकि मुकदमा लंबित होने के एक कारण जजों की कमी भी बताया जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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