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नीट-यूजी पेपर लीक मामला: राउज एवेन्यू कोर्ट ने 10 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 11 जुलाई तक बढ़ाई

राउज एवेन्यू कोर्ट ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सभी 10 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 11 जुलाई तक बढ़ा दी है. सीबीआई अब आरोपियों के पुराने कड़ियों और 2025 के रिकॉर्ड्स की भी जांच कर रही है.

Rouse Avenue Court

नीट यूजी (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार शुभम खैरनार, मनीषा वाघमारे, धनंजय लोखंडे सहित सभी 10 आरोपियों को राउज एवेन्यू कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश किया गया, जहां कोर्ट ने 11 जुलाई तक के लिए उनकी न्यायिक हिरासत की अवधि को बढ़ा दिया है. जिन आरोपियों को कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया, उनमें यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, धनंजय लोखंडे, तेजस हर्षद शाह, शुभम खैरनार, मनीषा वाघमारे, मनीषा हवलदार और डॉक्टर मनोज थिरुरे शामिल थे.

परीक्षा शुरू होने से पहले ही सक्रिय था संगठित गिरोह: सीबीआई

मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई (CBI) ने कहा था कि खैरनार सहित अन्य आरोपी परीक्षा शुरू होने से पहले ही नीट-यूजी 2026 परीक्षा के प्रश्नपत्रों के लीक होने में सक्रिय रूप से शामिल थे. इससे पहले अदालत ने भी टिप्पणी करते हुए कहा था कि शुरुआती तथ्यों से ऐसा लगता है कि पैसों के लालच में गोपनीय परीक्षा के पेपर लीक करने और उन्हें बांटने के लिए एक संगठित गिरोह काम कर रहा था. सीबीआई ने शुभम खैरनार को नासिक से, मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल व दिनेश बिवाल को जयपुर (राजस्थान) से और यश यादव को हरियाणा से गिरफ्तार किया था.

भ्रष्टाचार निवारण और नए लोक परीक्षा अधिनियम के तहत FIR दर्ज

सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर (FIR) में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों से निवारण) अधिनियम, 2024 की अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. फिलहाल सीबीआई की टीम पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पेपर लीक की जड़ें कितनी गहरी हैं.

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रडार पर पुराना रिकॉर्ड

सूत्रों के मुताबिक, मास्टरमाइंड दिनेश लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े नेटवर्क के संपर्क में था. जांच एजेंसियों के सामने सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह आया है कि दिनेश के परिवार के पांच बच्चों का वर्ष 2025 में सरकारी मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस (MBBS) पाठ्यक्रम में चयन हुआ था. खुद आरोपी ने भी सोशल मीडिया पर नवंबर 2025 में इसे परिवार के लिए गर्व का विषय बताते हुए पोस्ट किया था. सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि कहीं इन अभ्यर्थियों को भी अवैध तरीके से 2025 की परीक्षा में लाभ तो नहीं पहुँचाया गया था.



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