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नीट-यूजी पेपर लीक मामले में गिरफ्तार दिनेश बिवाल और विकास बिवाल ने जमानत याचिका को वापस लिया

नीट-यूजी पेपर लीक मामले में आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिका पर राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई.

Rouse Avenue Court

नीट-यूजी पेपर लीक मामले में गिरफ्तार दिनेश बिवाल और विकास बिवाल ने दायर याचिका को राऊज एवेन्यु कोर्ट ने वापस ले लिया है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया है, हालही में सीबीआई ने उनके यहां छापेमारी की है और मोबाइल फोन सहित अन्य दस्तवेज़ों को जब्त किया है. लिहाजा जमानत पर फैसला करना अभी सही नही है.

इस मामले में सीबीआई ने 13 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया है. जिन लोगों को आरोपी बनाया है, उनमें यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रहलाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरूरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवलदार शामिल है. ये सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में है. सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 315 (5), 318 (4), 61(2), 238, 303 (2), भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13 (2) और 13 (1)(ए) और पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अफेयर मिन्स) एक्ट की धारा 10, धारा 3, 4, 5 और 11 के तहत एफआईआर दर्ज किया था. मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस मामले में हर मिनट कीमती है और सभी वकीलों के समन्वय की आवश्यकता होगी.

कोर्ट दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की ओर से दायर जमानत याचिका पर 18 अगस्त को सुनवाई करेगा. दरअसल मांगीलाल बिवाल ने अपने बेटे विकास के लिए पेपर का जुगाड़ करने के लिए शुभम खैरनानर से संपर्क किया, सीबीआई जांच में विकास के मोबाइल से लीक पेपर भी मिला था. सीबीआई के मुताबिक मांगीलाल ने ये पेपर यश यादव से 10 लाख रुपए में खरीदा था.

5 लाख में पेपर लीक कराने का आरोप

पूछताछ में पता चला कि विकास और यश की जान-पहचान राजस्थान के सीकर में कोचिंग के दौरान हुई थी. हालही में सीबीआई ने शिवराज मोटेगांवकर की ओर से दायर जमानत का विरोध करते हुए कई चौकाने वाले खुलासे किया है. सीबीआई ने राऊज एवेन्यु कोर्ट को बताया था कि लातूर स्थित कोचिंग सेंटर संचालक शिवराज मोटेगांवकर ने एनटीए पैनल में शामिल केमिस्ट्री टीचर पीवी कुलकर्णी से पेपर लीक करवाने के लिए 5 लाख रुपए दिए थे.

सीबीआई का दावा था कि यह पूरा मामला सुनियोजित साजिश का हिस्सा था और इसमें कई लोग शामिल थे. इतना ही नहीं लातूर में रेणुकाई केमेस्ट्री क्लासेज चलाने वाले शिवराज मोटेगांवकर ने अपने बेटे को कुलकर्णी की कोचिंग क्लास में दाखिला दिलवाया था, जहां से उन्हें लीक किया गया प्रश्नपत्र मिला. जांच एजेंसी का आरोप है कि मोटेगांवकर को ये सवाल पी. वी. कुलकर्णी से मिले थे. जो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के उस पैनल का हिस्सा थे जिसने नीट-यूजी 2026 का प्रश्नपत्र तैयार किया था.

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-भारत एक्सप्रेस



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