केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट को आश्वस्त किया है कि हाल ही में पारित ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम 2025 के तहत प्राधिकरण के गठन और आवश्यक नियम- कायदों की निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ मामले में सुनवाई कर रही है. कोर्ट बघीरा कैरम (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है. मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को स्पष्ट किया, कि राष्ट्रपति ने अधिनियम पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, लेकिन यह अभी भी आधिकारिक रूप से लागू नही है. सरकार द्वारा औपचारिक अधिसूचना जारी करने के बाद वह प्राधिकरण के गठन और नियमों का मसौदा तैयार करना शुरू करेगी.
याचिकाकर्ताओं की आशंका समय से पहले- हाई कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि कानून अभी तक आधिकारिक रूप से लागू नहीं हुआ है, इसलिए याचिककर्ताओ की आशंका समय से पहले हैं. कोर्ट 8 सप्ताह बाद इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. याचिका में संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है. याचिका में कहा गया है कि अधिनियम की धारा 5 के तहत लगाए गए प्रतिबंध अस्पष्ट है. याचिका में कहा गया है कि ऑनलाइन मनी गेम (धारा 2(1)(g) और ई-स्पोर्ट्स धारा 2(1)(c) की परिभाषाओं को पढ़ते हुए कानून मनमाना और असंवैधानिक है.
कैरम कंपनी ने दी संवैधानिक चुनौती
दायर याचिका में कहा गया है कि यह अधिनियम कौशल के खेल और भाग्य के खेल के बीच अंतर किए बिना सभी प्रकार के ऑनलाइन मनी गेम्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है. याचिकाकर्ता के अनुसार कैरम एक ऐसा खेल है जिसे अदालतों ने पहले ही कौशल के खेल के रूप में मान्यता दे दी है और इसे अखिल भारतीय कैरम महासंघ और अंतरराष्ट्रीय कैरम महासंघ दोनों द्वारा ऑफलाइन विनियमित किया जाता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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