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हिमाचल भवन के बाद अब बीकानेर हाउस होगा कुर्क, 50 लाख का भुगतान न करने पर कोर्ट ने दिया आदेश

जज ने कोर्ट के निर्देश का पालन न करने पर बीकानेर हाउस को कुर्क करने का आदेश दिया है. कोर्ट 29 नवंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.

Bikaner House

दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस को कुर्क करने का आदेश जारी.

राजस्थान की नोखा नगर पालिका परिषद के स्वामित्व वाले बीकानेर हाउस को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने कुर्क करने का आदेश दिया है. यह आदेश एक कंपनी एनवायरो इंफ्रा इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड को 50 लाख 31 हजार 512 रुपये का भुगतान देने में विफल रहने के बाद दिया गया है. पटियाला हाउस कोर्ट के जिला जज विद्या प्रकाश ने आदेश पारित करते हुए कहा कि नगर पालिका इस साल की शुरुआत में दायर अपील को खारिज किए जाने के बाद एनवायरो इंफ्रा इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में 2020 का मध्यस्थता पुरस्कार अंतिम रूप ले चुका है.

बीकानेर हाउस होगा कुर्क

जज ने कोर्ट के निर्देश का पालन न करने पर बीकानेर हाउस को कुर्क करने का आदेश दिया है. कोर्ट 29 नवंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. जज ने 18 सितंबर को पारित आदेश में कहा कि अदालत के निर्देश का पालन नहीं किया गया है. अदालत ने कहा कि इस बात पर गौर करते हुए कि बार-बार मौका दिए जाने के बावजूद देनदार अपनी संपत्ति का हलफनामा पेश करने के निर्देश का पालन करने में विफल रहा है. अदालत ने डिक्री धारक (डी एच) की ओर से पेश किए गए दलीलों से सहमति जताते हुए पाया कि देनदार की अचल संपत्ति अथार्त बीकानेर हाउस के खिलाफ कुर्की वारंट जारी करने का यह एक उपयुक्त मामला है.

हिमाचल भवन कुर्क करने का दिया था आदेश

अदालत ने 21 जनवरी 2020 को मध्यस्थता अधिकरण द्वारा पारित आदेश को लागू करने के अनुरोध वाली एक अर्जी पर यह आदेश दिया है. बता दें कि इससे पहले हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने आर्बिट्रेशन अवार्ड का पालन करने के लिए दिल्ली स्थित हिमाचल भवन को कुर्क करने का आदेश दिया है.

यह भी पढ़ें- Air Pollution: सरकार ने कहा- दिल्ली में अब 50% कर्मचारियों के लिए ‘वर्क फ्रॉम होम’, निजी संस्थानों के लिए भी सुझाव

हाई कोर्ट ने सेली हाइड्रो इलेक्ट्रिक पावर कंपनी लिमिटेड की ओर से ऊर्जा विभाग के विरुद्ध दायर अनुपालन याचिका पर सुनवाई के बाद यहआदेश दिया है. हाई कोर्ट ने ऊर्जा सचिव के प्रधान सचिव को इस बात की तथ्यात्मक जांच करने का आदेश भी दिया कि किस विशेष अधिकारी अथवा अधिकारियों की चूक के कारण 64 करोड़ रुपये के सात प्रतिशत ब्याज सहित अवॉर्ड राशि जमा नहीं की गई. कोर्ट ने कहा कि दोषियों का पता लगाना इसलिए आवश्यक है क्योंकि ब्याज को दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों से व्यक्तिगत रूप से वसूलने का आदेश दिया जाएगा.

-भारत एक्सप्रेस



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