पेगासस जासूसी मामले की जांच की मांग को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट अप्रैल में सुनवाई करेगा. यह याचिका वकील एम एल शर्मा सहित अन्य लोगों की ओर से दायर की गई है.
उपरोक्त याचिका में कहा गया है कि पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, नेताओं और अन्य की इजराइली स्पाइवेयर पेगासस का इस्तेमाल करके सरकारी एजेंसियों द्वारा कथित रूप से जासूसी कराए जाने की खबरों की अदालत की निगरानी में एसआईटी से जांच कराने की मांग की गई है.
अधिवक्ता एम एल शर्मा ने अपनी याचिका में कहा है कि पेगासस कांड गहरी चिंता का विषय है और यह भारतीय लोकतंत्र, न्यायपालिका और देश की सुरक्षा पर गंभीर हमला है तथा व्यापक स्तर और बिना किसी जवाबदेही के निगरानी करना नैतिक रूप से गलत है. जिसके बाद कोर्ट ने इसको लेकर 27 अक्टूबर 2021 को एक कमेटी पूर्व जस्टिस आर वी रवीन्द्रन की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की एक कमेटी गठित की थी, जिसने अपनी अंतरिम रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दी थी.
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मोबाइल फोनों की जांच में इजरायली पेगासस स्पाइवेयर प्रयोग होने के साक्ष्य नहीं मिले हैं. रिपोर्ट ने कमेटी ने कहा था कि 29 मोबाइल फोनों की जांच की गई जिनमें से पांच में मालवेयर पाया गया, लेकिन यह पुष्ट नहीं होता कि इनमें पेगासस का प्रयोग हुआ. कोर्ट ने रिपोर्ट को वेबसाइट पर डालने का आदेश दिया था. कमेटी ने यह भी कहा था कि सरकार ने जांच में सहयोग नहीं दिया. वैसे सरकार की ओर से पहले से कहा जाता रहा है कि सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा होने के कारण सब कुछ सार्वजनिक नहीं किया जा सकता.
ज्ञात हो कि फ्रांसीसी मीडिया गैर-सरकारी संगठन फॉरबिडेन स्टोरीज ने स्पाइवेयर पेगासस बनाने वाली इजरायली कंपनी एनसीओ के लीक हुए डेटाबेस को हासिल किया तो पाया कि उसमें 10 देशों के 50 हजार से ज्यादा लोगों के फोन नंबर है. इनमें से 300 भारतीय है. इस संगठन ने 16 मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर इसपर अध्ययन किया.
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