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2024 पुणे पोर्श हिट एंड रन केस: नाबालिग के पिता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब

पुणे पोर्श कांड में आरोपी नाबालिग के पिता विशाल अग्रवाल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है. जस्टिस बीवी नागरत्ना ने परवरिश पर सवाल उठाते हुए कहा कि बच्चों को समय देने के बजाय एटीएम कार्ड और स्पोर्ट्स कार थमा देना ही ऐसी वारदातों की असली जड़ है.

2024 Pune Porsche Case
Edited by Vaibhav Gupta

2024 Pune Porsche हिट एंड रन मामलों में आरोपी नाबालिग के पिता विशाल अग्रवाल की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट मार्च में अगली सुनवाई करेगा.

फेक रिपोर्ट दिलवाने की साजिश

याचिकाकर्ता विशाल अग्रवाल पर खून के नमूने बदलने और कार में सवार लोगों को नॉन अल्कोहल रिपोर्ट दिलवाने की साजिश रचने का आरोप है. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट से अशपाक मकांदर सहित अन्य को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि इसी मामले में समान आरोपों का सामना कर रहे सह-आरोपियों को पहले ही राहत दी जा चुकी है. ऐसे में हम समानता के आधार पर जमानत देते है. अशपाक मकांदर पर आरोपी ड्राइवर के खून के नमूनों से छेड़छाड़ करने की साजिश रचने का आरोप है.

इससे पहले कोर्ट ने आशीष मित्तल, आदित्य सूद और बिचौलिए अमर गायकवाड़ को कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दिया था. जस्टिस नागरत्ना ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि कानून को ऐसे माता-पिता तक पहुचना ही होगा. इन लोगों के पास बच्चों से बात करने तक का समय नही होता है, इसलिए वे पैसों और स्पोर्ट्स कार से सेलिब्रेशन की भरपाई करते है.

माता-पिता बच्चों को नियंत्रित करने में असफल

कोर्ट ने कहा था कि पहले आप नाबालिग बच्चों को शराब पीने की अनुमति देते है. फिर जश्न मनाने के लिए उन्हें स्पोर्ट्स कार दे देते हैं. माता-पिता पूरी तरह बच्चों को नियंत्रित करने में असफल रहे है.

जस्टिस नागरत्ना ने कहा था कि सेलिब्रेशन का मतलब तेज रफ्तार में गाड़ी चलाकर फुटपाथ पर चल रहे गरीब लोगों को कुचलना नही होता है. उन्होंने कहा था कि यह पहली बार ऐसा नही हुआ है. कानून को अब सख्त होना पड़ेगा. कोर्ट ने कहा था कि इसके असली जिम्मेदार माता-पिता है, जो बच्चों के साथ समय नही बिताते है और एटीएम कार्ड थमा देते है.

जनता का आक्रोश स्वभाविक

कोर्ट ने कहा था कि इस तरह की घटना के बाद जनता का आक्रोश स्वभाविक है, और उसे रोका नही जा सकता. कोर्ट ने कहा था कि हमारे पास और भी बहुत कुछ कहने को है. कोर्ट ने ब्लड सैम्पल से छेड़छाड़ के आरोपी को भी जमानत दे दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एक अपीलकर्ता आरोपी के पिता का मित्र है, दूसरा पिछली सीट पर बैठे बच्चे का पिता है और तीसरा अपीलकर्ता अमर गायकवाड़ कथित बिचौलिया है, जिसे 3 लाख रुपए लेने का आरोप है.

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया था कि तीनों अपीलकर्ता पिछले 18 महीने से जेल में बंद है. इसमें 100 से अधिक गवाह है. ट्रायल शुरू होने का फिलहाल कोई आसार नही है. जबकि नाबालिग चालक है उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड में चल रहा है.

ये भी पढ़ें: फर्जी शिकायतों वालें मामलो में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सहित सभी राज्यो और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस भेज मांगा जवाब

-भारत एक्सप्रेस



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