फर्जी शिकायतों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली ने पीठ ने नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है.
अदालत के कदम पर गैगिंग का आरोप
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से दी गई दलील पर सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत जब भी व्यवस्था बनाए रखने या अनुशासन कायम करने के लिए कदम उठाती है, तो उस पर गैगिंग (आवाज दबाने) का आरोप लगता है.
उन्होंने कहा कि हम पर यह आरोप लगाया जाएगा कि हम बोलने की.आजादी पर रोक लगा रहें है, लेकिन हमें इससे डरना क्यों चाहिए?लोग आरोप लगाते हैं और फिर गायब हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि समाज को अधिक जागरूक और संवेदनशील बनाने की आवश्यकता है. नागरिकों को.केवल अपने मौलिक अधिकारों की ही नहीं, बल्कि अपने पड़ोसी के मौलिक अधिकारों की भी जानकारी और सम्मान होना चाहिए.
फर्जी मामलो के कारण बोझ
सीजेआई ने आगे ये भी कहा कि संविधान में निहित भाईचारे के सिद्धांत को व्यवहार में उतारना जरूरी है, तभी लोकतांत्रिक ढांचा मजबूत रहेगा. वहीं, याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कहा कि अदालतों पर बोझ वास्तविक मामलों के कारण नहीं, बल्कि फर्जी मामलों के कारण बढ़ रहा है.
उन्होंने जमीन के मामलों को एससी/एसटी के मामले में तब्दील कर देते है. दायर याचिका में कहा गया है कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ झूठी शिकायतें, झूठे बयान, झूठी सूचना, झूठे सबूत और झूठे आरोप, जीवन की स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकार तथा विधि के शासन के लिए गंभीर खतरा है.
बीएनएस 2023 विशिष्ट प्रावधान
दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ झूठी शिकायतें संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकार के लिए खतरा है. याचिका में कहा गया है कि बीएनएस 2023 के अध्याय 14 में इन खतरों से निपटने के लिए विशिष्ट प्रावधान हैं. लेकिन केंद्र और राज्यों ने इन्हें लागू करने के लिए उचित कदम नहीं उठाए हैं.
दायर याचिका में केंद्र सरकार और सभी राज्यों को पक्षकार बनाया गया है. याचिकाकर्ता ने मांग की है कि थानों, तहसील कार्यालयों, जिला अदालतों, पंचायत भवनों और शैक्षणिक संस्थानों में सजा संबंधी प्रावधानों वाले बोर्ड लगाए जाएं.
साथ ही, एफआईआर दर्ज करने से पहले शिकायतकर्ता को झूठी शिकायत के कानूनी परिणामों के बारे में अनिवार्य रूप से सूचित किया जाए और उससे एक शपथ पत्र लिया जाए कि दी गई जानकारी पूर्णतः सत्य है. झूठी शिकायत, जांच और गवाही को जघन्य अपराध घोषित करने और दोषी को 10 साल तक कि सजा की मांग की गई है. इसके अलावा दोषी की संपत्ति जब्त करने और नागरिकता रद्द करने की मांग की गई है.
दर्ज मामलों और दोषसिद्धि दर में अंतर
याचिका में कहा गया है कि फर्जी मामलों से निर्दोष लोगों की प्रतिष्ठा और जीवन बर्बाद हो रहा है. दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि भारतीय न्याय संहिता 2023 के चौदहवें अध्याय में झूठी शिकायतों और फर्जी साक्ष्यों से संबंधित अपराधों के लिए स्पष्ट प्रावधान है, लेकिन इनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है.
याचिका में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरों के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि दर्ज मामलों और दोषसिद्धि दर में काफी अंतर है, जो झूठे मुकदमों और मनगढ़ंत साक्ष्यों की समस्या की ओर संकेत करता है. इससे आपराधिक न्यायप्रणाली पर बोझ पड़ रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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