यूपी के कुंडा से एमएलए रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को घरेलू हिंसा मामले में राऊज एवेन्यु कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने राजा भैया के खिलाफ दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कथित पुरानी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने से शिकायतकर्ता को कोई मदद नहीं मिलेगी.
एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार ने अपने फैसले में साफ कहा है कि अगर हाल ही में कोई ऐसा कृत्य नहीं हुआ है, जो क्रूरता को साबित करता हो तो बहुत पुराने आरोपों को फिर से उठाने के लिए आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
पुराने आरोपों को आधार नहीं बना सकते
राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह की शिकायत के बाद यह चार्जशीट दाखिल किया गया था. कोर्ट ने कहा कि राजा भैया और भानवी दोनों 2017 से 2025 तक अलग रह रहे थे. दूसरी ओर, भानवी सिंह ने घरेलू हिंसा की एफआईआर मार्च 2025 में दर्ज कराई थी. कोर्ट का तर्क था कि चूंकि हाल के वर्षो में क्रूरता की कोई नई घटना सामने नहीं आई है, इसलिए पुराने आरोपों को आधार बनाकर आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि पुराने आरोपों को फिर से उठने के लिए आपराधिक कानून लागू नहीं किया जा सकता है. आरोप समय सीमा से भी बाहर हैं. साथ ही धारा 498A आईपीसी के तहत अपराध के मूल तत्व भी प्रथम दृष्टया सामने नहीं आए हैं. ऐसे में चार्जशीट को संज्ञान में नहीं लिया जा सकता है.
साल 2023 में आया था मामला
राजा भैया और भानवी सिंह की शादी 1994-95 के आसपास हुई थी. बीते कई वर्षों से दोनों के बीच रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं और सार्वजनिक तौर पर आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आते रहे है. साल 2023 में विवाद ने नया मोड़ तब लिया, जब राजा भैया ने दिल्ली के साकेत फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की. इस याचिका में उन्होंने पत्नी पर क्रूरता और परित्याग जैसे गंभीर आरोप लगाए थे.
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