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करोड़ों का खेल या कागजों की हेरफेर? कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की किस्मत पर दिल्ली HC का बड़ा कदम

Rajendra Bharti Bank Scam: मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 25 साल पुराने कॉपरेटिव बैंक घोटाले में मिली 3 साल की सजा के खिलाफ उनकी अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट इस मामले में 10 जुलाई को अपना अहम फैसला सुनाएगा, जिससे विधायक की सदस्यता और भविष्य तय होगा.

Delhi High Court
Edited by Shubhra Rai

Rajendra Bharti Bank Scam: कॉपरेटिव बैंक घोटाला मामले में दोषी मध्य प्रदेश के दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की ओर से दायर अपील पर सभी पक्षों की जिरह के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोर्ट 10 जुलाई को मामले में अपना फैसला सुनाएगा. राजेंद्र भारती ने ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी केस में ट्रायल कोर्ट द्वारा मिली सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में अपील की है.

सजा पर रोक की मांग

दायर याचिका में भारती ने सजा पर रोक की मांग की है. राऊज एवेन्यु कोर्ट ने राजेंद्र भारती और बैंक के कर्मचारी कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति को राऊज एवेन्यु कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है. साथ ही कोर्ट ने दोनों को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दिया था. कोर्ट ने दोनों को निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने के लिए 30 दिन का समय दिया था. कोर्ट ने फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) घोटाला मामले में राजेंद्र भारती को भारतीय दंड संहिता की धारा 120B, 420, 467, 468 और 471 के तहत दोषी करार दिया था. 25 साल पुराने घोटाले मामले में यह सजा सुनाई है.

तीन साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी

विधायक राजेंद्र भारती ने अपनी मां के नाम बैंक में 10.50 लाख रुपए की एफडी तीन साल के लिए कराई थी, जिस पर 13.50 फीसदी ब्याज मिल रहा था. आरोप है कि बाद में एफडी की अवधि तीन साल से बढ़ाकर 15 साल कर दी गई. इसी बैंक के कर्मचारी नरेंद्र सिंह ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई थी. कोर्ट ने दर्ज शिकायत को गंभीरता से लेते हुए इसे धोखाधड़ी का मामला माना और केस दर्ज करने के आदेश दिए. जिस समय यह धोखाधड़ी का मामला सामने आया था उस समय राजेंद्र भारती बैंक के संचालक मंडल के अध्यक्ष थे.

बैंक को आर्थिक नुकसान

अभियोजन पकड़ के मुताबिक राजेंद्र भारती ने अपनी पदीय स्थिति और अधिकारों का दुरूपयोग करते हुए बैंक कर्मचारी रघुवीर शरण प्रजापति के साथ मिलकर बैंक दस्तवेजों लेजर बुक, एफडी स्लिप और रसीद में काट-छांट कर एफडी की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 10 और फिर 15 वर्ष कर दी. इसका उद्देश्य 13.50 फीसदी ब्याज दर का लाभ लंबे समय तक अपनी मां और संबंधित संस्था को दिलाना था. जांच में सामने आया कि इस हेराफेरी के जरिए वर्ष 1999 से 2011 तक प्रतिवर्ष लगभग 1.35 लाख रुपए का अनुचित लाभ लिया गया, जिससे बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ.

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-भारत एक्सप्रेस 



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