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बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका पर एनआईए को नोटिस

जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर ने संसद सत्र में भाग लेने के लिए पटियाला हाउस कोर्ट में अंतरिम जमानत याचिका दायर की है.

जम्मू-कश्मीर टेरर फंडिंग मामले में आरोपी और बारामूला से सांसद राशिद इंजीनियर की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका पर पटियाला हाउस कोर्ट ने एनआईए को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 21 जनवरी को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. राशिद इंजीनियर को 28 जनवरी से शुरू हो रहे संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति मांगी है.

इससे पहले दिसंबर में कोर्ट ने संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति देते हुए कहा था कि राशिद इंजीनियर हिरासत में संसद सत्र में भाग ले सकते है. कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि वहन खर्च को लेकर लगाई गई शर्त बरकरार रहेगा. इसको लेकर राशिद इंजीनियर ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपील दायर कर रखी है. राशिद इंजीनियर ने आगामी सत्र में भाग लेने के लिए हिरासत पैरोल या अंतरिम जमानत की मांग की है. दायर अर्जी में राशिद इंजीनियर ने कहा है कि वह एक सांसद हैं और उन्हें अपना सार्वजनिक कर्तव्य निभाने के लिए 28 जनवरी से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में उपस्थित रहना जरूरी है.

उमर अब्दुल्ला को हराकर बनाई राजनीतिक पहचान

इसके पहले कोर्ट ने इंजीनियर रशीद को सितंबर में हुए उपराष्ट्रपति के चुनाव में वोट डालने की अनुमति दी थी. कोर्ट ने राशिद को 24 जुलाई से 4 अगस्त तक संसद सत्र में भाग लेने की अनुमति दी थी.राशिद इंजीनियर ने 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामूला सीट पर जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को हराया था. राशिद इंजीनियर शेख अब्दुल रशीद के नाम से भी जाना जाता है. वह 2017 के आतंकवादी वित्तपोषण (आतंकी फंडिंग) मामले में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से रशीद 2019 से जेल में बंद है. पटियाला हाउस कोर्ट ने 16 मार्च 2022 को हाफिज सईद, सैयद सलाहुद्दीन, यासीन मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद वताली, बिट्टा कराटे, आफताब बट्ट उर्फ पीर सैफुल्ला के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था.

एनआईए में मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सहयोग से लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, जेकेएलएफ, जैश-ए- मोहम्मद जैसे संगठनों ने जम्मू कश्मीर में आम नागरिकों और सुरक्षा बलों पर हमले और हिंसा को अंजाम दिया. 1993 में अलगाववादी गतिविधियों अंजाम देने के लिए ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस की स्थापना की गई.

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-भारत एक्सप्रेस



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