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प्रदोष के सरकारी गवाह बनने से अभिनेता दर्शन की बढ़ी मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद हत्या मामले में बड़ा मोड़

बेंगलुरु की निचली अदालत ने रेणुकास्वामी हत्या मामले में आरोपी प्रदोष एस. राव को सरकारी गवाह बनने की अनुमति दे दी है.

बेंगलुरु की निचली अदालत ने रेणुकास्वामी हत्या मामले में आरोपी प्रदोष एस. राव को सरकारी गवाह बनने की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने प्रदोष को माफी देते हुए अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में शामिल करने का आदेश दिया है. इस हत्याकांड में कन्नड़ अभिनेता दर्शन थुगुदीपा मुख्य आरोपी है. 58 वें अतिरिक्त सिटी सिविल एंड सेशंस जज सुजाता संब्रानी ने प्रदोष की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया है.

प्रदोष का सरकारी गवाह बनना अभियोजन पक्ष के लिए अहम घटनाक्रम माना जा रहा है. उसकी गवाही से हत्या से पहले और उसके दौरान हुई घटनाओं की अंदरूनी जानकारी आने की उम्मीद है. इससे पहले 13 अगस्त को कर्नाटक हाई कोर्ट ने दर्शन की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने प्रदोष की सरकारी गवाह बनने की अर्जी का विरोध करते हुए अदालत में अपना पक्ष रखने का अधिकार मांगा था.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म अभिनेता दर्शन, पवित्र गौड़ा सहित 5 अन्य की जमनात को रद्द करते हुए सरेंडर करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने पुलिस से इनलोगों को गिरफ्तार करने को कहा था. पिछले दिनों कर्नाटक सरकार की ओर से दायर याचिका पर सभी पक्षों की जिरह के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. जस्टिस पारदीवाला ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह एक बहुत ही कड़ा संदेश देता है कि आरोपी चाहे कोई भी हो, वह कानून से ऊपर नहीं है. कोर्ट ने कहा था कि जिस दिन हमें पता चलेगा कि आरोपी को पांच सितारा दर्जा दिया जा रहा है, सबसे पहला कदम जेल अधीक्षक को निलंबित किया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के जमानत आदेश पर जताई नाराजगी

इससे पहले सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट द्वारा दर्शन सहित अन्य को दी गई जमानत पर नाराजगी जताई थी. जस्टिस पारदीवाला ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि हम हाई कोर्ट जैसी गलती नहीं करेंगे, न ही हम दोषसिद्धि और न ही बरी करने पर कोई फैसला देंगे. कोर्ट ने पवित्रा गौड़ा के वकील से कहा था कि क्या आपको नहीं लगता कि हाई कोर्ट ने असल में अभियुक्त को बरी कर दिया? जिस तरीके से आदेश लिखा गया है, माफ कीजिए क्या हाई कोर्ट बाकी मामलों में भी ऐसे आदेश देती हैं? कोर्ट ने कहा था कि सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि हाई कोर्ट ने हत्या जैसे 302 के मामले में ये कहा कि गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए.

हाई कोर्ट के जज से ऐसी गलती की उम्मीद नहीं- सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस पारदीवाला ने कहा था कि अगर निचली अदालत ऐसी गलती करें तो समझ में आता है, लेकिन हाई कोर्ट के न्यायाधीश से ऐसी उम्मीद नही की जा सकती. मामले की सुनवाई के दौरान कर्नाटक सरकार की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई थी. राज्य सरकार ने कहा था कि ट्रायल डे-टू-डे चलाया जाएगा. इसपर कोर्ट ने पूछा था कि इस केस में ही डे-टू-डे ट्रायल क्यों? जबकि कई विचाराधीन कैदी 5-6 साल से जेल में बंद है. कोर्ट ने कहा था कि क्या आपको नही लगता कि वास्तव में सभी को बरी कर दिया है. जून 2024 में बेंगलुरु में एक फ्लाईओवर पर 33 साल के ऑटो चालक रेणुका स्वामी को मृत पाया गया.

रेणुका दर्शन का प्रशंसक था. दिनेश के कहने पर उसका अपहरण किया गया था. इसके बाद उसकी हत्या की गई. इस मामले में पुलिस ने 4000 पन्नों का चार्जशीट दाखिल किया है. जिसके बाद पुलिस ने 1300 पेज का सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया है. जिसमें 30 से अधिक गवाहों, एफएसएल और अन्य तकनीकी जांच दस्तावेज सहित 40 से अधिक साक्ष्य शामिल है.

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-भारत एक्सप्रेस



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