बिहार के बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह (RJD MP Sudhakar Singh) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR Order) को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दायर की है. यह याचिका अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत और अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड सुश्री नीमा के माध्यम से दाखिल की गई. याचिका में चुनाव आयोग (Election Commission) के 24 जून 2025 के आदेश को असंवैधानिक और गैरकानूनी करार देने की मांग की गई है. याचिका के अनुसार, यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 14, 19(1)(a), 21, 325 और 326 का उल्लंघन करता है. साथ ही, यह जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के खिलाफ है.
मतदाता सूची से नाम हटाने का खतरा
याचिका में कहा गया है कि एसआईआर प्रक्रिया से गांव, गरीब, प्रवासी और हाशिए पर मौजूद मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं. इसमें प्रक्रियात्मक पारदर्शिता और सुरक्षा उपायों की कमी है. याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि यह प्रक्रिया केवल बिहार में लागू की गई, जो विभेदकारी रवैया दर्शाता है. सांसद सुधाकर सिंह ने पहले भी चुनाव आयोग की आलोचना की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि आयोग ने सुप्रीम कोर्ट की सलाह के बावजूद आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया.
Supreme Court में 28 जुलाई को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को करेगा. पहले की सुनवाइयों में कोर्ट ने कहा था कि चुनाव आयोग का कदम संवैधानिक है, लेकिन चुनाव से कुछ महीने पहले वोटर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया सही नहीं है. कोर्ट ने आयोग से सवाल किया था कि आधार कार्ड को नागरिकता के प्रमाण के रूप में क्यों नहीं माना जाता. आयोग ने जवाब दिया कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है. कोर्ट ने यह भी कहा कि 30 दिनों में प्रक्रिया पूरी करना व्यवहारिक नहीं है.
निष्पक्षता को लेकर उठे सवाल
यह याचिका बिहार में मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्षता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाती है. सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला इस मुद्दे पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है.
Follow Bharat Express on X
यह भी पढ़िए: गायब रूसी पत्नी और बेटे के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से रेलवे और बस अड्डों पर निगरानी का आदेश
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
