सुप्रीम कोर्ट ने डीपफेक के इस्तेमाल पर अंकुश और दुरुपयोग के लिए नियम बनाने की मांग वाली याचिका का निपटारा कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है. यह याचिका अधिवक्ता आरती साहा की ओर से दायर की गई थी. दायर याचिका में डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने की मांग की गई थी.
मामले की सुनवाई के दौरान मेटा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने कोर्ट को बताया कि इसको लेकर केंद्र सरकार नियम बनाने जा रही हैं. वही फेसबुक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि मसौदा नियम प्रकाशित कर दिए गए हैं. इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह याचिका एआई के लिए दिशानिर्देश और लाइसेंसिंग व्यवस्था बनाने के लिए दायर की गई है. खासकर उन मामलों में जहां चित्र, वीडियो और विशेष रूप से डीपफेक तैयार किए जाते हैं. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि याचिका में जो मुद्दे उठाए गए हैं, उन सभी पर विचार विमर्श हुआ है. इसलिए इस स्तर पर किसी निर्देश की आवश्यकता नहीं है. याचिका में यह भी कहा गया है कि एआई, डीपफेक के अनियंत्रित प्रसार से निजता, गरिमा और प्रतिष्ठा का गंभीर उल्लंघन हुआ है.
AI क्लोनिंग से बढ़ा खतरा
याचिका में यह भी कहा गया था कि आवाज और छवियों की क्लोनिंग करने में सक्षम एआई डिवाइस के अनियंत्रित उपयोग से व्यक्तियों को पहले ही भारी नुकसान हो चुका है और यह सार्वजनिक विश्वास सामाजिक सद्धाव और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आसन्न खतरा है. इससे पहले भी एक याचिका दायर की गई थी, जिसको खारिज करते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि हम नहीं कह रहे हैं कि इस मुद्दे को पूरी तरह से खारिज किया जाना चाहिए, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट पिछले कुछ वर्षों से इसपर सुनवाई कर रहा है. आप भी उसमें शामिल हों. उन्होंने कहा था कि अगर हम हस्तक्षेप करेंगे तो हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा की गई पूरी कवायद बंद हो जाएगी.
फर्जी कंटेंट पर रोक की मांग
एआई और डीपफेक के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाने की मांग की थी. सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर एआई जेनरेटेड या डीपफेक कंटेंट की पहचान करने और उसे हटाने के लिए नियम बनाए जाएं. इसमें केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को पक्षकार बनाया था. बता दें कि यह एक वैश्विक समस्या है, जो वैश्विक और गंभीर बनती जा रही है. तकनीक के जरिए किसी तस्वीर या विडियो में किसी व्यक्ति की जगह अन्य व्यक्ति की तस्वीर लगा दिया जाता है. इससे किसी को भी गुमराह किया जा सकता है.
डीपफेक वीडियो एक बार पोस्ट हो जाए तो शिकायत की जा सकती है. इसपर 72 घंटे में कार्रवाई होती है. अभिनेत्री आलिया भट्ट, प्रियंका चोपड़ा, नोरा फतेही डीपफेक के शिकार हो चुकी है. इसके अलावे सचिन तेंदुलकर, टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन दिवंगत रतन टाटा, इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति शामिल है.
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-भारत एक्सप्रेस
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