साल्बोनी जमीन घोटाला
Salboni Land Scam: पश्चिम बंगाल के चर्चित साल्बोनी जमीन घोटाले से जुड़े मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अदालत ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के पर्सनल असिस्टेंट (PA) सुमित रॉय की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश जांच रिपोर्ट का गहराई से अध्ययन करने के बाद यह फैसला सुनाया है.
अदालत में क्या बोले याचिकाकर्ता के वकील?
सुनवाई के दौरान सुमित रॉय की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल नारायण ने कोर्ट में दलील दी कि हालांकि सरकार की ओर से सौंपी गई जांच रिपोर्ट पहली नजर में गंभीर प्रतीत होती है, लेकिन उन्होंने जांच के तौर-तरीकों पर बड़े सवाल उठाए हैं. उनका कहना था कि पूछताछ के दौरान सुमित से ऐसे मामलों और लेन-देन पर सवाल किए गए जिनका इस जमीन घोटाले से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है.
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को जानकारी दी कि मुख्य तौर पर पूछताछ ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के बैंक खाते में हुए लेन-देन को लेकर की गई. उन्होंने बताया कि पार्टी के खाते में करीब 42.17 करोड़ रुपये जमा हुए हैं, लेकिन इन सबका सुमित रॉय की व्यक्तिगत स्थिति से कोई संबंध नहीं है. पार्टी के खातों का नियमित रूप से ऑडिट कराया जाता है और चुनाव आयोग के सामने भी इसका पूरा विवरण दाखिल किया जाता है.
सुमित रॉय के वकील ने यह भी बताया कि उनका बैंक खाता साल 2019 में खोला गया था और उसमें सबसे बड़ी रकम मात्र 60 हजार रुपये ही जमा हुई है. उन्होंने दलील दी कि पुलिस और जांच एजेंसियों ने सुमित से कुल 88 घंटे तक लंबी पूछताछ की है, लेकिन इसके बावजूद ऐसा कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो सके कि इन व्यक्तिगत लेन-देन का कथित साल्बोनी जमीन घोटाले से कोई भी नाता है.
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पश्चिम बंगाल सरकार का पक्ष
दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पूछताछ के तरीके पर उठाए गए सभी सवालों का कड़ा विरोध किया. उन्होंने कोर्ट के सामने साफ किया कि जांच के दौरान अधिकारियों को कौन-से और किस तरह के सवाल पूछने हैं, यह पूरी तरह से जांच अधिकारी का अधिकार क्षेत्र है. उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि जांच की प्रक्रिया में इस तरह के बारीक और शुरुआती अंतर निकालने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए.
क्या है साल्बोनी जमीन घोटाला?
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल के साल्बोनी जमीन घोटाले से जुड़ा हुआ है. इस मामले में गंभीर आरोप है कि राज्य सरकार की जमीन को अवैध तरीके से निजी संपत्ति के रूप में बेच दिया गया. इसके बाद उससे मिलने वाली रकम के एक बड़े हिस्से को टीएमसी पार्टी के आधिकारिक खाते में ट्रांसफर किया गया या जमा कराया गया. सुमित रॉय इसी पूरे मामले में लगातार जांच और पूछताछ का सामना कर रहे हैं. गिरफ्तारी की आशंका को भांपते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी लगाई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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