Bharat Express DD Free Dish

कोयला ब्लॉक आवंटन मामला: संदीप दीक्षित पहुंचे राउज एवेन्यू कोर्ट, CBI की क्लोजर रिपोर्ट को दी चुनौती

कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में संदीप दीक्षित ने राउज एवेन्यू कोर्ट में लिखित दलीलें दाखिल कर CBI की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया. उन्होंने NDIL को कोयला ब्लॉक आवंटन में नियमों के उल्लंघन और भारी गड़बड़ी के आरोप लगाए.

Sandeep Dikshit Files Written Submissions In Rouse Avenue Court Opposing CBI Closure Report In Coal Scam Bharat Express
Edited by Vaibhav Gupta

कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता संदीप दीक्षित ने राऊज एवेन्यु कोर्ट में लिखित दलीले दाखिल की है. संदीप दीक्षित द्वारा दाखिल लिखित दलील में सीबीआई की ओर से जांच बंद करने के फैसले को गलत बताया है.
उन्होंने अपने जवाब में कहा है कि निप्पॉन डेनरो इस्पात लिमिटेड (एनडीआईएल) को कोयला ब्लॉक आवंटित करने की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी, मनमानी और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने जैसी गंभीर अनियमितताएं हुई है.

पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल

संदीप दीक्षित द्वारा कोर्ट को दिए गए लिखित दलील के मुताबिक, बारांज l-lV, नंद और बांदर/मोरपार कोयला ब्लॉकों के आवंटन में कोल इंडिया लिमिटेड की दिशा निर्देशों का पालन नही किया गया है. दस्तवेजों में दावा किया गया है कि 14 जुलाई 1993 को तैयार की गई दो अलग-अलग सूचियों में विरोधाभास था और पश्चिमी कोयला क्षेत्रों के कई ब्लॉकों को बाद की सूची में शामिल किया गया.

शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया ने आवंटन की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए. इसके अलावे संदीप दीक्षित ने किल्होनी ब्लॉक के आवंटन पर भी सवाल उठाए है. इसको लेकर उन्होंने कई आपत्तियां उठाई है.

आवंटन प्रक्रिया तय गाइडलाइंस के विपरीत

दस्तावेज के अनुसार सीआईएल और वेस्टर्न कोल्फिरल्डस लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल) की ओर से किल्होनी को कैप्टिव माइनिंग के लिए आवंटित करने पर आपत्ति जताई गई थी. इसके बावजूद 24 अगस्त 1998 को स्क्रीनिंग कमेटी ने ब्लॉक का आवंटन कर दिया. खास बात यह बताई गई कि किल्होनी को कैप्टिव माइनिंग के लिए सूची में 19 नवंबर 1998 को शामिल किया गया, यानी आवंटन के बाद.

शिकायतकर्ता की दलील है कि यह प्रक्रिया सीआईएल को तय गाइडलाइंस के विपरीत थी. दस्तावेज में कई गवाहों के बयानों का भी हवाला दिया गया है, जिनके अनुसार किल्होनी ब्लॉक पहले से पहचान किए गए कैप्टिव माइनिंग ब्लॉकों की सूची में शामिल नही था और इसके आवंटन पर सीआईएल तथा डब्ल्यूसीएल के अधिकारियों ने आपत्ति जताई थी.

क्या है आरोप?

लिखित दलील में आरोप लगाया गया है कि एनडीआईएल पर आवंटित कोयला ब्लॉकों की एक्सप्लोरेशन लागत का पूरा भुगतान नहीं करने का भी आरोप लगाया गया है. दस्तावेज के मुताबिक कुल एक्सप्लोरेशन लागत 4.34 करोड़ रुपए थी, जबकि कंपनी ने 20 अप्रैल 1994 को सिर्फ 1 करोड़ रुपये का भुगतान किया. इसके बाद डब्ल्यूसीएल और मंत्रालय की ओर से बकाया राशि जमा करने के कई बार निर्देश दिए गए.

शिकायतकर्ता ने एनडीआईएल ने जापान की मित्सुई के साथ मिलकर 1000 मेगावाट का पावर प्रोजेक्ट स्थापित करने की बात कही थी, लेकिन इस संबंध में कोई MoU पेश नही किया गया. बाद में सेंट्रल इंडिया पावर कंपनी लिमिटेड और सेंट्रल इंडिया कोल कंपनी लिमिटेड के गठन और अलग-अलग शेयरहोल्डिंग संरचनाओं का प्रस्ताव रखा गया.

यह भी पढ़ें: “यह पुलिस राज बंद होना चाहिए”: दीवानी विवाद में अवैध गिरफ्तारी पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने पुलिस को लगाई फटकार

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read