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चंबल में माफिया राज पर SC का ‘हंटर’: अवैध खनन पर पूर्ण रोक, चप्पे-चप्पे पर होगी CCTV से नजर!

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में माफियाओं द्वारा किए जा रहे अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राज्य सरकारों की विफलता पर तीखी टिप्पणी करते हुए निर्देश दिया है.

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Edited by Vaibhav Gupta

मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य (Chambal Sanctuary) और राजस्थान में हो रहे अवैध रेत खनन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश पारित किया है. कोर्ट ने अवैध खनन पर पूरी तरह से रोक लगा दिया है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश पारित किया है. कोर्ट 11 मई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.

CCTV के लिए करें विस्तृत मुल्यांकन

कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करेगी कि अवैध रेत खनन के लिए बार-बार इस्तेमाल किए जाने वाले सभी मार्गों पर वाईफाई और सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं. कोर्ट ने यह भी कहा कि अधिकारी सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए विस्तृत मूल्यांकन करेंगे. कोर्ट ने कहा कि कैमरों की लाइव फीड संबंधित जिले के एसपी या सीनियर एसपी और संबंधित वन अधिकारी की निगरानी में रखी जाएगी.

कोर्ट ने ये भी कहा कि अवैध रेत खनन का कोई भी मामला पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को टीम जुटाने सहित त्वरित कार्रवाई शुरू करने का दायित्व होगा. कोर्ट ने कहा संबंधित अधिकारी प्रायोगिक आधार पर यह सुनिश्चित करेंगे कि खनन गतिविधियों में उपयोग की जाने वाली मशीनों और गाड़ियों में जीपीएस ट्रैकिंग उपकरण लगाए जाएं. ताकि वास्तविक समय में निगरानी और पता लगाने की सुविधा मिल सके.

मशीनें और बुलडोजर है धर्मनिर्पेक्ष: SC

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि ये सब आपकी नाक के नीचे हो रहा है. हलफनामों में लिखा है कि आपके पास हथियार नहीं हैं, फिर राज्य सरकार का अस्तित्व ही क्यों है? कोर्ट ने कहा था कि ये बहुत अजीब बात है, खनन माफिया जिन खुदाई मशीनों और बुलडोजरों का का इस्तेमाल करते हैं, वे धर्मनिरपेक्ष हैं. वे लोगों की जाति नहीं देखते, इसके विपरीत, हमें यही रुक जाना चाहिए, बेहद दुखद स्थिति है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्य सरकारें पूरी तरह विफल हो चुकी हैं या यूं कहें कि वे मिलीभगत कर रही हैं. कोर्ट ने केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति और राज्य के अधिकारियों से इन उपायों को लागू करने के लिए व्यवहारिक समाधान तलाशने को कहा था.

रिपोर्ट को लेकर कोर्ट ने किया सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि वे वन रक्षक की हाल ही में हुई मौत की जांच चल रही है. कोर्ट ने पूछा था कि क्या वो रिपोर्ट पुल गिरने और लोगों की मौत होने के बाद आएगी? एएसजी राजू ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि हम इसे एक हफ्ते के भीतर दे देंगे.

कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में अवैध खनन को बिना किसी रोक टोक के जारी रहने की अनुमति कैसे दी गई. कोर्ट ने पूछा था आपने ऐसा होने क्यों दिया? क्या राज्य के अधिकारी अंधे हैं? रिपोर्ट में कहा गया है कि नेशनल चंबल वाइल्डलाइफ सेंक्चुअरी में अवैध खनन रोक के लिए टास्क फोर्स बनाने की सिफारिश की गई है. इसमें तीनों ही राज्य मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के वन, खनन और पुलिस विभाग में बेहतर समन्वय भी स्थापित होगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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