नासिक से जुड़े यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण का मामला अब देश के सबसे बड़ी अदालत पहुंच गया है. दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि नासिक में कथित तौर पर एक संगठित धर्मांतरण रैकेट सक्रिय है, जिसने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि यह कोई पहली घटना नही है. लेकिन यह घटना को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया है. उन्होंने इसे संगठित अपराध बताया है. अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि नासिक जैसी घटनाएं देश की डेमोग्राफी बदलने और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है. दायर याचिका में दावा किया गया है कि प्रत्येक दिन हजार लड़कियों को प्रेमजाल में फंसा कर इनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है. उन्होंने इसे रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की है.
याचिका में सख्त दिशा-निर्देश की मांग
बता दें कि धर्म परिवर्तन को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले से ही संज्ञान ले चुका है. जिसपर सुनवाई कर रहा है. दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि धर्म की आजादी का अधिकार तो है, लेकिन यह आजादी सार्वजनिक व्यवस्था और नैतिकता की शर्तों के अधीन है. यानी कि इसके आड़ में धोखे या जबरन धर्म परिवर्तन नही कराया जा सकता है. इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि ऐसे कथित धर्मांतरण अभियानों को विदेशों से आर्थिक सहायता मिलती है, जिसका उद्देश्य भारत की एकता, अखंडता व सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है.
बता दें कि महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के बीपीओ यूनिट में गंभीर आरोप सामने आने के बाद पुलिस ने 9 अप्रैल को एफआईआर दर्ज किया था. जिसके बाद कोर्ट ने कई कंपनी के एचआर सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया है. जिनमें दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसारी शामिल है.
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-भारत एक्सप्रेस
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