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सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना स्पीकर को अवमानना नोटिस जारी किया, बीआरएस विधायकों की अयोग्यता पर तुरंत फैसला करने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने बीआरएस विधायकों की अयोग्यता मामले में अपने पूर्व आदेश का पालन नही करने पर तेलंगाना विधानसभा के स्पीकर को अवमानना का नोटिस जारी किया है.

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने बीआरएस विधायकों के अयोग्यता के मामले में दिए गए आदेश का पालन नही करने पर तेलंगाना के स्पीकर को अवमानना का नोटिस जारी किया हैं. सीजेआई बी आर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश दिया हैं. सीजेआई गवई ने कहा कि विधानसभा स्पीकर खुद तय करें कि वह नया साल कहां मनाना चाहते हैं. सीजेआई गवई ने यह भी कहा कि अयोग्य विधायकों पर अगले एक सप्ताह में फैसला लिया जाना चाहिए. अन्यथा अवमानना के लिए तैयार रहना चाहिए. सीजेआई ने कहा कि हम पहले ही कह चुके हैं कि अध्यक्ष को कोई संवैधानिक संरक्षण प्राप्त नहीं हैं. कोर्ट ने यह टिप्पणी बीआरएस नेता केटीआर की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान की है.

31 जुलाई को कोर्ट ने विधायकों के अयोग्यता से संबंधित मामले में विधानसभा स्पीकर को तीन महीने में फैसला लेने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश देते हुए कहा था कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस मुद्दे पर अदालत द्वारा जारी नोटिस के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सात महीने बाद संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया.

दलबदल कानून पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

इन 10 विधायकों ने कांग्रेस पार्टी जॉइन किया था. जिन्हें अयोग्य करार दे दिया गया. दलबदल कानून को लेकर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि ये मुद्दा देशभर में बहस का विषय रहा है और यदि समय रहते इसे नहीं रोका गया, तो यह लोकतंत्र की नींव को कमजोर कर सकता है. कोर्ट ने संसद में दिए गए भाषणों का भी हवाला दिया था.

कोर्ट ने राजेश पायलट और देवेंद्रनाथ मुंशी जैसे सांसदों के भाषणों का जिक्र करते हुए कहा था कि विधायक या सांसद की अयोग्यता तय करने का अधिकार स्पीकर को दिया गया, ताकि अदालतों का समय बर्बाद न हो और मामला जल्दी सुलझ जाए. कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा था कि किसी भी विधायक को कार्यवाही में देरी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और यदि ऐसा किया जाता है, तो इसे न्यायिक प्रक्रिया में बाधा समझा जाएगा.

साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा था कि विधायकों के दलबदल मामले संविधान की 10 वीं अनुसूची से जुड़े होते है और ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक प्रणाली की निष्पक्षता बनी रहे.

SC ने स्पीकर और विधायकों को चेताया

मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई गवई ने कहा था कि इस तरह का बयान संविधान के 10वें अनुसूची (दल बदल विरोधी कानून) का उपहास उड़ाने जैसा है. जस्टिस बीआर गवई ने आगे कहा था कि रामलीला मैदान में कही गई बात सदन में कही गई बात से अलग है. कोर्ट ने कहा था कि जब राजनेता विधानसभा में कुछ कहते हैं तो उसमें कुछ पवित्रता होती है.

कोर्ट ने यह भी कहा था कि तब लोकतांत्रिक सिद्धांतों का क्या होगा? और कहा था कि हर मामले में परिणाम यह नही हो सकता कि ऑपरेशन सफल हो और मरीज मर जाए. जिन विधायकों पर दलबदल का आरोप लगा है उनमें श्रीनिवास रेड्डी परिगी, बंदला कृष्ण मोहन रेड्डी, काले यादैया, टी. प्रकाश गौड़, ए. गांधी, गुडेम महिपाल रेड्डी और एम. संजय कुमार शामिल है.

ये भी पढ़ें- लाल किला कार ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार आमिर अली को 10 दिन की एनआईए रिमांड पर

-भारत एक्सप्रेस



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