Article 370 Terror Case: सुप्रीम कोर्ट से जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर घाटी में आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े मामले में गिरफ्तार आरोपित सुहैल अहमद ठाकोर को बड़ी राहत मिल गई है. सुहैल पर एनआईए ने केस दर्ज किया था. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने सभी पक्षो की दलील सुनने के बाद यह निर्देश दिया है.
दिल्ली हाई कोर्ट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख
कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर ठाकोर अदालत द्वारा लगाई गई शर्तो का उल्लंघन करते है तो एजेंसी उसकी जमानत रद्द करने की अदालत से मांग कर सकती है. केंद्र सरकार ने 5 अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त कर दिया था, जिसने जम्मू कश्मीर के पूर्ववर्ती राज्य को विशेष दर्जा दिया गया था. ठाकोर ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें हाई कोर्ट ने ठाकोर को जमानत देने से इनकार कर दिया था.
प्रभावित करने और कट्टरपंथी बनाने में शामिल
ठाकोर को 20 अक्टूबर 2021 को गिरफ्तार किया गया था. अभियोजन पक्ष का आरोप था कि कश्मीर घाटी में एक बड़ी साजिश रचने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद एफआईआर दर्ज किया था. अभी तक के जांच के मुताबिक यह साजिश लश्कर-ए-,तैय्यबा और हिजबुल मुजाहिदीन सहित अन्य प्रतिबंधित आतंकवादी समूहों द्वारा रची गई थी.
आरोप लगाया था कि ये आतंकी समूह, पाकिस्तान में स्थित अपने सप्रेषकों और नेताओं के सहयोग से स्थानीय युवाओं को प्रभावित करने और उन्हें कट्टरपंथी बनाने में शामिल थे.
कोर्ट का जमानत देने से इनकार
ठाकोर पर आरोप है कि उसने आतंकवादी संगठनों और उनके सहयोगियों को शरण प्रदान करने में सक्रिय भूमिका निभाई थी. इससे पहले ठाकोर ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था. पटियाला हाउस कोर्ट ने ठाकोर को जमानत देने से इनकार कर दिया था.
जिसके बाद उसने हाई कोर्ट में उसे 2023 में चुनौती थी, लेकिन हाई कोर्ट से भी राहत नहीं मिलने पर उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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