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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम: फर्जी डिग्री वाले वकीलों पर कसेगा शिकंजा, सोशल मीडिया के लिए भी बनेंगे नियम

Bar Council of India Interim Policy: फर्जी डिग्री के सहारे वकालत करने वालों और सोशल मीडिया पर अमर्यादित व्यवहार करने वाले वकीलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट सख्त रुख अपना रहा है. जुलाई में होने वाली सुनवाई में सभी लॉ यूनिवर्सिटीज को पक्षकार बनाया जा सकता है.

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Edited by Shubhra Rai

Bar Council of India Interim Policy: सुप्रीम कोर्ट फर्जी डिग्री वाले वकीलों को हटाने और सोशल मीडिया पर वकीलों के व्यवहार के लिए नियम तय करने की मांग वाली याचिका पर जुलाई में सुनवाई करेगा. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस बी. मोहना की पीठ ने दायर याचिका पर सुनवाई के बाद मामले को जुलाई में सूचीबद्ध करने को कहा.

आचार संहिता में बदलाव की जरुरत

मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि यह एक नया सुधार लग रहा है, लेकिन सभी लॉ यूनिवर्सिटीज को भी पक्षकार बनाना होगा. साथ ही उन्हें यह बताना होगा कि उनके संस्थान से कौन-कौन असली लॉ ग्रेजुएट हैं. वही बीएआई के वकील ने कहा कि हम इस पर एक अंतरिम पॉलिसी पेपर जमा करेंगे. उन्होंने कहा कि आचार संहिता में भी कुछ बदलाव करने की जरूरत है. इसपर कोर्ट ने कहा कि इस मामले को जुलाई में कोर्ट खुलेगा, तो किसी भी सोमवार को सूचीबद्ध करेंगे. हमें शायद नए सदस्यों वाली एक नई कमेटी बनानी पड़े.

याचिका में राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री बनाने की मांग

याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि हम आपको दिखा सकते हैं कि किस तरह के बुरे बयान दिए जा रहे है और मुझे यकीन है कि उनका कानून से कोई लेना-देना नहीं है. इसपर सीजेआई ने कहा कि वकील बहुत जिम्मेदार होते है. बार के युवा सदस्यों को मजबूत बनाना होगा.

जबतक उन्हें ट्रेनिंग नहीं दी जाती, मुख्यधारा में नहीं लाया जाता और भीड़-भाड़ वाली अदालतों में जगह नहीं दी जाती, तब तक यह समस्या बनी रहेगी. कुछ युवा वकीलों ने सच मे अच्छे और काम के एसोसिएशन बनाए है. यह एक अच्छी बात है. दायर याचिका में राष्ट्रीय डिजिटल रजिस्ट्री बनाने की मांग की गई है.

सोशल मीडिया आचार संहिता बनाने की मांग

दायर याचिका में प्रत्येक वकील को यूनिक नेशनल एडवोकेट आईडी, नामांकन की वास्तविक समय मे जांच, अनुशासनात्मक रिकॉर्ड और QR कोर्ड आधारित सार्वजनिक प्रोफाइल उपलब्ध कराने की मांग की गई है. साथ ही वकीलों के लिए सोशल मीडिया आचार संहिता बनाने की मांग की गई है. सीजेआई ने याचिकाकर्ता को सुझाव दिया है कि पहले एक मॉडल या मॉड्यूल तैयार किया जाए, फिर अदालत देखेगी की आगे क्या कदम उठाया जा सकता है.

सीजेआई ने यह भी कहा कि युवा वकीलों को प्रोत्साहित करना और उन्हें पेशे में सुरक्षित एवं सम्मानजनक अवसर उपलब्ध कराना अधिक महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि यदि युवा वकीलों को पर्याप्त प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और अदालतों में उचित स्थान मिलेगा, तो ऐसी कई समस्याएं स्वतः कम हो जाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस 



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