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दलितों के मामले में केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने जांच से किया इनकार

दलित ईसाइयों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चर्च में जातिगत भेदभाव और बहिष्कार के आरोप लगाए हैं. अल्पसंख्यक आयोग ने जांच से इनकार करते हुए याचिका को खारिज करने की मांग की है.

Edited by Radha Priya

सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के दलितों के मामले में केंद्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने अपना हलफनामा दाखिल किया है. दाखिल हलफनामे में आयोग ने जांच से इनकार कर दिया है.

SC में दाखिल हलफनामे में आयोग ने कहा है कि जाति आधारित भेदभाव, अत्याचार धर्म परिवर्तन करने के बावजूद खत्म नहीं होता, अछूत होने का टैग पीछा ही नही छोड़ता है.

आयोग ने अपने जवाब में यह भी कहा है कि दलित ईसाई जे. दौस प्रकाश सहित अन्य लोगो ने मद्रास हाईकोर्ट में राज्य पुलिस के रिपोर्ट पर अपना जवाबी जवाब दाखिल नही किया है. इसलिए आयोग इस मामले में आगे नहीं बढ़ सकता है.

यह कहना गलत नही होगा कि ऐसे में उसे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992 के तहत किसी मामले में जांच करने का अधिकार नही है. आयोग ने अपने जवाब में याचिकाकर्ताओं की सभी आरोपों से इनकार करते हुए याचिका को खारिज करने की मांग की है.

दलित ईसाइयों ने चर्च में भेदभाव को लेकर SC में लगाई गुहार

सुप्रीम कोर्ट ने 21 फरवरी को तिरुचिरापल्ली के दलित ईसाई ग्रामीणों की याचिका पर आयोग, तमिलनाडु पुलिस और चर्च अधिकारियों सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.

याचिका में कोट्टाप्लायम पैरिश क्षेत्र में जाति आधारित अत्याचार, छुआछूत और भेदभाव का आरोप लगाया गया है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि ईसाई धर्म अपनाने के बावजूद उनके साथ जाति के.आधार पर भेदभाव किया जा रहा है. उनके साथ अछूत जैसा व्यवहार किया जा रहा है.

साथ ही दुख जताया कि उन्हें चर्च के उत्सवों में भाग लेने की अनुमति नहीं है और वार्षिक उत्सव के दौरान उनकी गली में कार नही आती. उन्होंने आरोप लगाया जा उन्हें चर्च का सदस्य भी नहीं माना जाता और उन्हें सामुदायिक भवन में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जाती.

हाईकोर्ट ने याचिका की थी खारिज

बता दें कि 30 अप्रैल 2024 को मद्रास हाईकोर्ट के मदुरै पीठ ने यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया था कि इस तरह के मुद्दे का समाधान सिविल अदालत में हो सकता है.

कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस मसले पर अंतिम फैसला राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को करना है. जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. जिस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है.


-भारत एक्सप्रेस



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