सुप्रीम कोर्ट ने बंद पड़े खातों का पैसा मालिकों तक पहुचाने के लिए केंद्रीकृत पोर्टल बनाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड, केंद्र सरकार सहित अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने को कहा है. यह याचिका आकाश गोयल नामक व्यक्ति की ओर से दायर की गई है.
संपत्तियों की जानकारी हेतु कोई एकीकृत तंत्र नहीं
दायर याचिका में आरबीआई, आईआरडीएआई, राष्ट्रीय बचत संस्थान या पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा विनियमित संस्थाओं में रखी गई सभी वित्तीय परिसंपत्तियों की सूची तक पहुचने के लिए एक केंद्रीकृत पोर्टल की मांग की गई है.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि 3.5 लाख करोड़ रुपए की राशि वैध निवेशकर्ताओं या जमाकर्ताओं को वापस नहीं की गई है. इसको लेकर अभी तक देश में ऐसा कोई एकीकृत तंत्र नहीं हैं, जिससे नागरिक या उनके परिजन विभिन्न बैंकों या वित्तीय संस्थाओं में पड़े अपनी संपत्तियों की जानकारी आसानी से प्राप्त हो सके.
कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से किया इनकार
याचिकाकर्ता के मुताबिक जनवरी में इसको लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर किया गया था. कोर्ट ने इस मुद्दे की महत्वता को स्वीकार करते हुए इसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था. हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने को कहा था. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है.
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा कि गया है कि बैंकों, बीमा कंपनियों, म्युचुअल फंड्स और पेंशन स्कीमों में नागरिकों का भारी पैसा पहुच से बाहर है. याचिकाकर्ता के वकील के मुताबिक लाखों लोगों का पैसा फंसा हुआ है.
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-भारत एक्सप्रेस
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