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बुजुर्गों को पेंशन और वृद्धाश्रम की स्थिति क्या? सुप्रीम कोर्ट का केंद्र और राज्यों को नोटिस

Supreme Court: देश में 10 करोड़ से अधिक बुजुर्गों के अधिकारों, पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और सभी राज्यों को 4 सप्ताह के भीतर वृद्धाश्रमों और सुविधाओं पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से बुजुर्गों की सुविधाओं पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी.

सुप्रीम कोर्ट

Edited by Shubhra Rai

Supreme Court: देश में बुजुर्गों की संख्या 10 करोड़ से अधिक हो गया है. इनके अधिकार सहित अन्य मांगों को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार सहित देश के सभी राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने वृद्धाश्रम बनाने और वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर चार सप्ताह में स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. यह याचिका पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने 2016 में दायर की थी.

भलाई और सुरक्षा के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार ने कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार को तीन प्रमुख मुद्दों पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी थी कि देश मे कितने वृद्धाश्रम है, बुजुर्गों को कितनी पेंशन दी जा रही है, और उनके लिए चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति क्या है, उन्होंने कहा कि कोर्ट ने इस मामले में लगातार निगरानी का आदेश दिया था. दायर याचिका में बुजुर्गों की भलाई और सुरक्षा के उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की गई थी.

याचिका में हर जिले में वृद्धाश्रम बनाने, वरिष्ठ नागरिकों के लिए पर्याप्त पेंशन और बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े निर्देशों को लागू करने की मांग की थी. इससे पहले सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि बुजुर्गों सहित सभी नागरिकों के गरिमा के साथ जीने, रहने और स्वास्थ्य के अधिकार सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी ही नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि इन अधिकारों की रक्षा हो और इन्हें लागू किया जाए.

अनुच्छेद 21 में प्रदत जीवन के अधिकार का हिस्सा

कोर्ट ने कहा था कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त जानकारी के आधार पर माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल एवं कल्याण कानून 2007 के प्रावधानों का समुचित प्रचार करने के लिए कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए ताकि बुजुर्गों को उनके संवैधानिक और विधायी अधिकारों के प्रति जागरूक बनाया जा सके. अदालत ने केंद्र सरकार को स्थिति रिपोर्ट देने को कहा था. इससे पहले कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सरकार ने 2007 में 60 से 79 आयु वर्ग के बुजुर्गों के लिए 200 रुपए प्रतिमाह की पेंशन निर्धारित किया था, जबकि 80 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए पेंशन की राशि को 500 रुपया किया था. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि गरिमा के साथ जीने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत जीवन के अधिकार का हिस्सा है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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