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30 साल से पत्नी की हत्या के आरोप में सजा काट रहे स्वामी श्रद्धानंद उर्फ मुरली मनोहर मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से झटका

सुप्रीम कोर्ट ने पत्नी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वामी श्रद्धानंद उर्फ़ मुरली मनोहर मिश्रा को झटका दिया है. राष्ट्रपति के समक्ष लंबित दया याचिका पर जल्द निर्णय की मांग वाली याचिका की त्वरित सुनवाई से कोर्ट ने इनकार कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट से पत्नी की हत्या के आरोप में सजा काट रहे स्वामी श्रद्धानंद उर्फ मुरली मनोहर मिश्रा को झटका लगा है. मिश्रा की ओर से दायर याचिका पर जल्द सुनवाई से कोर्ट ने इनकार कर दिया है. जस्टिस जे के महेश्वरी और जस्टिस विजय विश्नोई की पीठ ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है. दायर याचिका में राष्ट्रपति के सामने लंबित दया याचिका पर जल्द फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की थी. स्वामी श्रद्धानंद उर्फ मुरली मनोहर मिश्रा की ओर से दया याचिका दिसंबर 2023 से राष्ट्रपति के सामने लंबित है.

मिश्रा ने इससे पहले भी याचिका दायर किया था, जिसपर केंद्र सरकार ने कहा था कि पत्नी की हत्या के आरोप में 30 साल से सजा काट रहे श्रद्धानंद की दया याचिका में राष्ट्रपति से अपील करने का अनुरोध किया गया है. श्रद्धानंद की ओर से पेश वकील ने कहा था कि याचिकाकर्ता 30 साल से अधिक समय से जेल में है और बीमारियों से पीड़ित है.

फांसी मांगना कानूनी अधिकार नहीं

कोर्ट ने कहा था कि आप चाहते हैं कि इसे फांसी में बदल दिया जाए? दोषी के वकील ने कहा कि यदि संभव हो तो आज की तारीख में फांसी बेहतर स्थिति हो सकती है. कोर्ट ने पूछा था, क्या आपने अपने मुवक्किल से बात की है? वकील ने जवाब दिया, मैंने उनसे बात नहीं कि है. उन्होंने दलील दी थी कि श्रद्धानंद को दी गई ऐसी सजा, तत्कालीन भारतीय दंड संहिता के तहत प्रदान नहीं कि गई थी. कोर्ट ने कहा था किसी भी आरोपी को दोषसिद्धि के आधार पर मौत मांगने का अधिकार नहीं है. आप अपनी जान नहीं ले सकते है. आत्महत्या का प्रयास करना भी एक अपराध है. इसलिए आप यह नहीं कह सकते कि अदालत को मृत्युदंड देना होगा. अदालत उचित सजा देगी.

श्रद्धानंद की पत्नी शाकेरेह मैसूर रियासत के पूर्व दिवान सर मिर्जा इस्माइल की पोती थी. सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2008 के अपने फैसले में कहा कि दंपती की शादी अप्रैल 1986 में हुई थी, लेकिन मई 1991 में शाकेरेह अचानक गायब हो गई. मार्च 1994 में केंद्रीय अपराध शाखा, बेंगलुरु ने शाकेरेह की गुमशुदगी की शिकायत की जांच अपने हाथ में ले ली थी.

पूछताछ में श्रद्धानंद ने उसकी हत्या करने की बात कबूल कर की थी. 1947 में जन्मे शाकेरेह दक्षिण भारत के प्रसिद्ध परिवारों में से एक थीं. वह एक इंडो-फारसी मुस्लिम जोड़े गुलाम हुसैन नमाजी और गौहर ताज बेगम नमाजी की बेटी थी. ताज बेगम सर मिर्जा इस्माइल की सबसे छोटी बेटी थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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