सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के स्कूलों में पढ़ने वाले ईडब्ल्यूएस बच्चों गैजेट्स मुहैया कराने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार से गैजेट्स संबंधी रिपोर्ट देने को कहा है. सीजीएआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह आदेश दिया है. जिससे सुनिश्चित हो सके कि कम आय वर्ग और पिछले बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा पाने में किसी तरह का कोई बाधा न हो. कोर्ट तीन फरवरी को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार कानून के प्रावधानों के तहत ईडब्ल्यूएस श्रेणी के छात्रों को डिजिटल गैजेट्स यानी मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट आदि मुहैया कराने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर दिल्ली सरकार की अपील पर दिया है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि 6 से 16 साल के हर बच्चे को शिक्षा पाने का समान अवसर मिलना चाहिए, चाहे उसकी पृष्ठभूमि कैसी भी हो. इसके लिए अनुच्छेद 22 A ( शिक्षा का अधिकार) के अंतगर्त यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है.
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
कोर्ट ने पूछा था कि क्या केंद्र सरकार के पास इस अधिकार को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कोई नीति है.यदि नही है तो अब तक कौन सी व्यवस्था रही है.यह याचिका जस्टिस फॉर ऑल नामक संगठन ने दाखिल किया था.मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील खगेश झा ने कोर्ट को बताया कि केवल ऑनलाइन कक्षाओं तक ही सीमित नही है, बल्कि ऑफलाइन समय मे भी होमवर्क, स्टडी मटीरियल, असाइनमेंट आदि अक्सर ई-मेल या व्हाट्सएप के जरिये भेजे जाते हैं.
ऐसे में जो बच्चे डिजिटल उपकरण नहीं रखते, वे स्वाभाविक रूप से पिछड़ जाते है. केंद्र सरकार ने कहा धन सीमित है, संसाधन मुहैया नहीं करा सकते. केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट से कहा कि धन सीमित है, इसलिए हम छात्रों को असीमित संसाधन मुहैया नहीं करा सकते.
इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम असीमित संसाधन या लग्जरी देने के लिए नहीं कह रहे हैं, लेकिन अनुच्छेद 21 A के प्रावधानों के तहत 6 से 16 साल तक के बच्चों को शिक्षा पाने में किसी तरह का बाधा नही आना चाहिए.
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-भारत एक्सप्रेस
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