Bharat Express DD Free Dish

‘मुफ्तखोरी’ वाली याचिका पर जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, CJI बोले- ‘अभी हमारे पास बहुत काम है’

Supreme Court Of India: सुप्रीम कोर्ट ने चुनावों में मुफ्त रेवड़ियां बांटने के वादों के खिलाफ दायर याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से मना कर दिया है. CJI सूर्यकांत की पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा कि फिलहाल कोर्ट के पास बहुत काम है. इस मामले में पहले कोर्ट ने करदाताओं के पैसे की बर्बादी और तुष्टिकरण की राजनीति पर चिंता जताई थी.

Supreme Court of India
Edited by Shubhra Rai

Supreme Court Of India: चुनाव में मुफ्त की योजनाओं पर लगाम लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी- मोहना की पीठ ने समक्ष याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने जल्द सुनवाई की मांग की .सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जब हमारे पास फ्रीबिज पर बात करने के लिए खाली समय होगा, तब हम इस पर सुनवाई करेंगे, अभी हमारे पास बहुत काम है .

मतदाता को रिश्वत देने जैसी बात है

वही याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कहा कि दोनों पक्ष कमेटी बनाने पर सहमत हो गए है, बस आपको मंजूरी देनी है .वही वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि हम उनका समर्थन करते है. दायर याचिकाओं में मुफ्त की चीजें बांटने का वादा करने वाली पार्टियों की मान्यता रद्द करने की मांग की है .उनकी याचिका में कहा गया है कि इस तरह की घोषणाएं एक तरह से मतदाता को रिश्वत देने जैसी बात है. यह न सिर्फ चुनाव में प्रत्याशियों को आसमान स्थिति में खड़ा कर देती है, बल्कि चुनाव के बाद सरकारी खजाने पर भी अनावश्यक बोझ डालती है. इससे सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि अगर आप फ्री बिजली, फ्री खाना और फ्री साइकिल देते हैं तो आप किस तरह का कल्चर बना रहे है.

कोर्ट ने कहा था कि,

करदाता के अलावे इन योजनाओं का खर्च कौन उठाएगा. उन्होंने कहा था कि भोजन और बिजली के बाद अब सीधा कैश ट्रांसफर किया जा रहा है. कोर्ट ने कहा कि रोजगार देने पर राज्य सरकार को ध्यान देना चाहिए. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि हम किस तरह का कल्चर बना रहे हैं. यह समझ मे आता है कि आप एक वेलफेयर कल्चर बना रहे है. उन्होंने कहा था कि यह समझ में आता है कि एक वेलफेयर सिस्टम के तहत लोगों को बिजली देना चाहते हैं. जो बिजली का चार्ज नहीं दे सकते.

लेकिन जो दे सकते हैं और जो नहीं दे सकते, उनके बीच फर्क किए बिना अगर आप बांटना शुरू करते हैं. तो क्या यह एक तरह की तुष्टिकरण पॉलिसी नहीं होगी? कोर्ट ने यह टिप्पणी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की है. जिसमें तमिलनाडु सरकार की कुछ समुदायों के लिए बिजली टैरिफ में सब्सिडी स्कीम को चुनौती दी गई थी.

यह भी पढ़ें: दिल्ली दंगा मामला: शरजील इमाम की जमानत याचिका पर हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब; 27 अगस्त को होगी सुनवाई

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read