सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही SIT से 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया है. सुनवाई के दौरान एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट पेश की. जिसपर सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह निर्देश दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज और दूसरे सबूतों की जांच कर आरोपियों की पहचान की है.
एसआईटी के मुताबिक चंदा चोरी से जुड़ी कीमती वस्तुओं की रसीद सॉफ्टवेयर के जरिए बनाई जाती है और इन वस्तुओं को एसबीआई के लॉकर में रखा जाता है. एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि मामले की जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है. यह चार्जशीट पीसी एक्ट के तहत गठित स्पेशल जज की अदालत में दाखिल की जाएगी.
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि दान की रकम और सामान की चोरी में शामिल सभी लोगों की पहचान कर ली गई है. एसआईटी के पास आरोप साबित करने के लिए बड़ी संख्या में दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक सबूत मौजूद है.जिसकी जांच एसआईटी कर रही है.
पारदर्शिता की मांग और वेबसाइट पर खुलासे की बात
पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कहा था कि लोगों ने 500 या 1000 रुपए दिए हैं. आखिरकार वह पैसा ट्रस्ट तक नहीं पहुचा है, ट्रस्ट को जो भी मिला है, उसे वेबसाइट पर दिखाया जाना चाहिए ताकि लोगों को पता चल सके कि उनका पैसा पहुच गया है. यह कोई टकराव वाला मामला नही है. कोर्ट ने कहा था एसआईटी को पहले रिपोर्ट देने दीजिए.
सीजेआई ने कहा था पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा था कि हम घटना की गुणवत्तापूर्ण जांच कर रहे है. सीजेआई ने एक याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट द्वारा निगरानी की मांग को खारिज कर दिया था. इसको लेकर निर्मोही अखाड़े, वकील अजय कुमार राय, वकील दिनेश कुमार यादव, हिंदू धर्म परिषद और राष्ट्रीय जनता दल के सांसद सुधाकर सिंह की ओर से याचिका दायर की गई है.
निर्मोही अखाड़े ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है.
दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि ट्रस्ट को सार्वजनिक ट्रस्ट घोषित किया जाए. साथ ही वित्तीय लेनदेन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है. अखाड़े ने अदालत से अनुरोध किया है कि वर्तमान ट्रस्ट के गठन और उसके कामकाज में पारदर्शिता की कमी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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