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‘संवैधानिक तंत्र ध्वस्त होने का तर्क खतरनाक, लग सकता है राष्ट्रपति शासन’, आइपैक मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल से जुड़े आईपीएसी मामले की सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि ‘संवैधानिक तंत्र के पूरी तरह ध्वस्त होने’ का तर्क गंभीर और दूरगामी परिणाम दे सकता है, क्योंकि इससे अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन जैसी स्थिति का प्रश्न उठ सकता है.

Supreme Court Final Deadline in Sheena Bora Murder Case

पश्चिम बंगाल आइपैक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक तंत्र के ध्वस्त होने का तर्क ‘दूरगामी परिणाम’ दे सकता है. क्योंकि इससे राष्ट्रपति शासन की स्थिति उत्पन्न हो सकती है. ईडी ने कोर्ट को बताया कि वह पश्चिम बंगाल राज्य में संवैधानिक तंत्र के पूरी तरह ध्वस्त होने का दावा नहीं कर रहा है.

ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि ईडी का तर्क है कि आइपैक मामले में कानून के शासन के उल्लंघन का था. साथ ही इसे संवैधानिक तंत्र की विफलता के रूप में नही जाना चाहिए. जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ईडी की ओर से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही है. कोर्ट 13 अप्रैल को मामले में अगली सुनवाई करेगा. एसजी मेहता ने सुनवाई के दौरान मालदा जिले में हुई घटना का जिक्र किया, जहां भीड़ ने न्यायिक अधिकारियों को घेर लिया था. इसपर जस्टिस अंजारिया ने एसजी मेहता से पूछा कि क्या ईडी यह तर्क दे रही है कि राज्य में संवैधानिक तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है. जस्टिस अंजारिया ने संकेत दिया है कि यह एक अतिवादी दृष्टिकोण हो सकता है, क्योंकि अनुच्छेद 356 के अनुसार संवैधानिक तंत्र ध्वस्त होना किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का आधार है.

जस्टिस अंजारिया ने स्पष्टता पर दिया जोर

इसके जवाब में एसजी मेहता ने कहा कि यह एक बड़ा मुद्दा है. इसपर फिर से जस्टिस अंजारिया ने कहा कि हमें उम्मीद है कि आप उस ओर इशारा नहीं कर रहे हैं. तब एसजी मेहता ने कहा कि ईडी इस बात पर कभी बहस नहीं कर सकता. मैं इसका जवाब इसी तरह दूंगा. ईडी इस बात पर बहस नहीं कर सकता और मैं अधिकारियों तथा संस्था के पक्ष में हूं. क्योंकि यह स्थिति कई वर्षों से बनी हुई है. इसपर जस्टिस अंजारिया ने कहा कि हमें नही पता. हम केवल यह पूछ रहे हैं कि क्या ऐसा है? जवाब में एसजी ने कहा कि नहीं, ईडी इसका जबाब नहीं दे सकती और यह मेरे विचार में नही है. ऐसा कुछ भी गुप्त नही है.

राज्य में कानून-व्यवस्था के उल्लंघन का आरोप

वही जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने एसजी मेहता से पूछा कि सवाल अनुच्छेद 32 के तहत शक्ति के प्रयोग से संबंधित है. एसजी मेहता ने स्पष्ट करते हुए कहा कि यही सीमित मुद्दा है. मैं कानून के शासन का उत्तर दे रहा हूं, क्योंकि कानून का शासन अनुच्छेद 14 से जुड़ा है, जो मुझे अनुच्छेद 32 के तहत दायर करने का अनुमति प्रदान करता है. यही वह उद्देश्य है जिसके लिए मैं ‘विधान के शासन’ शब्द का प्रयोग कर रहा हूं, न कि संवैधानिक तंत्र के टूटने’ से संबंधित. सुनवाई के दौरान एसजी मेहता ने दलील देते हुए कहा कि राज्य में कानून और व्यवस्था का पूर्णतः उल्लंघन हुआ है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पहली बार ऐसा नही किया है. उन्होंने बताया कि सीबीआई ने 2019 में तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त से पूछताछ करने का प्रयास किया था, तब मुख्यमंत्री ने सीबीआई ऑफिस के सामने धरना दिया था.

एसजी मेहता ने कहा कि जब 2021 में नारदा मामले में टीएमसी के कुछ सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था, तब मुख्यमंत्री ने इसी तरह का सार्वजनिक प्रदर्शन किया था और पांच हजार से अधिक कार्यकर्ताओं ने सीबीआई के विशेष अदालत को घेर लिया था, जिससे न्यायाधीश के लिए भयभीत करने वाली स्थिति उत्पन्न हो गई थी.

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-भारत एक्सप्रेस



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