कड़कड़डूमा कोर्ट ने दिल्ली दंगे के दौरान पुलिस के हवलदार पर पिस्तौल तानने के आरोपी शाहरुख पठान को राहत देने से इनकार कर दिया है. कोर्ट ने पठान को जमानत देने से इनकार कर दिया है. इससे पहले शाहरुख पठान को अपने बीमार पिता की देखभाल के लिए 15 दिनों की अंतरिम जमानत दे दिया था. अदालत ने स्पष्ट किया था कि पठान को अपने बीमार पिता की देखभाल करने एवं अपने परिवार के लिए धन की व्यवस्था करने के लिए अंतरिम जमानत दी गई है.
दिल्ली पुलिस ने उसकी जमानत याचिका का विरोध किया था. उसने कहा था कि पठान गंभीर जुर्म में जेल में बंद है. अगर उसे जमानत दी जाती है तो वह जमानत का उल्लंघन कर सकता है. इसपर अदालत ने पठान को निर्देश दिया कि वह जेल से रिहा होने के बाद वह अपना मोबाइल नंबर जांच अधिकारियों को देगा और मोबाईल फोन अपने पास ‘स्विच ऑन’ करके रखेगा.
CAA विरोधी प्रदर्शन में जाफराबाद में पुलिसकर्मी पर चली गोली
यह मामला सीएए विरोधी प्रदर्शन के दौरान हुई गोलीबारी की घटना से जुड़ा है. वहां एक प्रदर्शनकारी ने जाफराबाद में वर्दीधारी पुलिस अधिकारी पर गोली चलाई थी. इस नाटकीय घटना को एक पत्रकार ने अपने मोबाइल फोन पर कैद कर लिया था, जो जल्द ही मीडिया में ब्रेकिंग न्यूज बन गई थी. दंगों के बाद पुलिस ने घटनास्थल से तीन खाली कारतूस बरामद किए थे. घटना के बाद शाहरु ख पठान उत्तर प्रदेश के शामली भागने से पहले दिल्ली में गिरफ्तारी से बचता रहा, जहां उसे अंतत: दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने गिरफ्तार कर लिया था.
पूछताछ के दौरान पठान ने खुलासा किया था कि उसने जिस कार का इस्तेमाल किया वह उसके चाचा के बेटे की थी. उसके खराब होने के बाद उसे हरियाणा के एक गैरेज में छोड़ दिया गया था. उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुई झड़पें, जो समर्थक और विरोधी सीएए समूहों के बीच भड़की थी, के परिणामस्वरूप कम से कम 53 मौतें हुई थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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