सुप्रीम कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र को लेकर दिए गए अपने फैसले में कहा है कि दिल्ली हाई कोर्ट सीमा सुरक्षा बल (CAPF) के कर्मियों की सेवा समाप्ति के मामले में सुनवाई कर सकता है. भले ही कार्रवाई का कारण दिल्ली से बाहर क्यों न उत्पन्न हुआ हो. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने बीएसएफ कॉन्स्टेबल बख्शीश अहमद की अपील को मंजूरी देते हुए यह फैसला सुनाया है.
अहमद ने अपनी बर्खास्तगी को चुनौती देते हुए रिट याचिका दायर की थी, जिसे दिल्ली हाई कोर्ट ने फोरम नॉन कन्वेनियंस के आधार पर खारिज कर दिया था. कांस्टेबल को इस आधार पर बर्खास्त किया गया था कि उसने अपनी पहली पत्नी के रहते हुए बिना उसकी अनुमति के दूसरी शादी कर ली थी. याचिकाकर्ता को पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के नारायणपुर में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, जहां उसकी तैनाती थी. कांस्टेबल निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब देने में विफल रहा, जिसके बाद कमांडेंट ने 2022 में उसे बिना किसी पेंशन लाभ के सेवा से बर्खास्त कर दिया.
कांस्टेबल को 12 साल बाद सेवा से किया गया बर्खास्त
याचिकाकर्ता 2010 में बीएसएफ में कांस्टेबल के तौर पर भर्ती हुआ था. उसको अक्टूबर 2022 में सर्विस से बर्खास्त कर दिया गया. स्टाफ कोर्ट ऑफ इंक्वायरी में पाया गया कि उसने अपनी पहली शादी रहते हुए और सक्षम अधिकारी से जरूरी इजाजत लिए बिना दूसरी शादी की थी. बर्खास्तगी के खिलाफ उसकी कानूनी याचिका को बाद में इंस्पेक्टर जनरल बीएसएफ, जम्मू ने खारिज कर दिया.
अहमद ने दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था. लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट ने दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था. हाई कोर्ट का कहना था कि संबंधित घटनाएं पश्चिम बंगाल और जम्मू कश्मीर में हुई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है. साथ ही कोर्ट ने मेरिट के आधार पर सुनवाई के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में बहाल कर दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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