Supreme Court on Aravali: अरावली की नई परिभाषा तय करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं को फिर से परिभाषित नहीं कर देती, तब तक अरावली के एक इंच हिस्से को भी खनन के लिए इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी जाएगी.
नवीनीकरण और पट्टों को देने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह टिप्पणी की है. मामले की सुनवाई के दौरान खनन पट्टा धारकों की ओर से पेश वकील ने कहा कि पट्टों को अंतीम रूप दिए बिना भी नवीनीकरण और पट्टों को देने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है. इसपर सीजेआई ने कहा कि हम अरावली में खनन गतिविधियों को फिर से शुरू करने की अनुमति देने वाला कोई आदेश पारित नहीं करेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अरावली पहाड़ियों और पर्वतमालाओं की परिभाषा और संबंधित मुद्दे पर स्वतः संज्ञान ले कर सुनवाई कर रहा है.
पट्टा धारकों के पक्ष में कोई आदेश पारित नहीं
कोर्ट ने याचिककर्ताओ के वकील से कहा कि यदि किसी खनन पट्टे को रद्द किया जाता है, तो संबंधित पक्ष सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है. कोर्ट ने कहा कि हम अभी खनन पट्टा धारकों के पक्ष में कोई आदेश पारित नहीं करेंगे, क्योंकि यह एक संवेदनशील मामला है, इसमें जल्दबाजी करना सही नहीं है. हालांकि कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान कहा था कि संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की समिति की रिपोर्ट आने तक कोई नया पट्टा जारी नहीं किया जाएगा.
खनन के लिए लाइसेंस दिए गए
कोर्ट ने कहा था कि अरावली की परिभाषा की पुनः जांच के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की समिति का गठन किया गया है. कोर्ट ने कहा था कि जिन गतिविधियों के लिए खासकर खनन के लिए लाइसेंस दिए गए थे, वे रुके रहेंगे. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि सुप्रीम कोर्ट की इमारत भी कभी अरावली क्षेत्र मानी जाती थी, लेकिन ऐसा आज कहना सही नहीं है.
मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई ने वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी से उनके मुवक्किल के लिए कहा था कि जिन्होंने 10 साल की कानूनी लड़ाई के बाद खनन पट्टा जीता था.
देश के पर्यावरण भविष्य से जुड़ा
समस्या यह है कि अभी तक किसी को नहीं पता कि अरावली क्या है. इसलिए अभी नहीं. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह मुद्दा सिर्फ तकनीकी नहीं बल्कि देश के पर्यावरण के भविष्य से जुड़ा हुआ है. सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह साफ किया था कि अरावली क्षेत्र में किसी तरह की अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
क्योंकि इसके परिणाम अपूर्णीय और दूरगामी होते है. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया था कि इसको लेकर कोई नई याचिका दायर नहीं होनी चाहिए.
राज्य में कोई अवैध खनन न हो
कोर्ट ने एमिकस क्यूरी से रिपोर्ट देने को कहा था. मामले की सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के एम नटराजन ने कहा था कि राज्य सरकार तत्काल यह सुनिश्चित करेगी कि राज्य में कोई अवैध खनन न हो. कोर्ट ने हाई पावर कमेटी से सदस्यों के नाम सुझाने को कहा था.
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से की गई सिफारिशों को स्वीकार करते हुए कहा था कि दुनिया की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक अरावली की रक्षा के लिए स्पष्ट और वैज्ञानिक परिभाषा बेहद जरूरी है.
मापदंडों के अनुसार अरावली रेंज में शामिल
समिति ने यह भी सुझाव दिया था कि पहाड़ी के साथ उसकी सहायक ढलानें, आसपास की भूमि और संबंधित भू-आकृतियां, चाहे उनका ढाल कितना भी हो, अरावली का हिस्सा मानी जाएंगी. इसी तरह दो पहाड़ियों के बीच का क्षेत्र भी निर्धारित मापदंडों के अनुसार अरावली रेंज में शामिल होगा.
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-भारत एक्सप्रेस
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