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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ‘सिर्फ रिश्वत की बरामदगी काफी नहीं’, यूपी सरकार को लगा झटका

सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामलों में एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि केवल रिश्वत की रकम बरामद होने भर से किसी सरकारी अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. पीठ ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोष सिद्ध करने के लिए रिश्वत मांगने का स्पष्ट सबूत होना अनिवार्य है.

Supreme Court Landmark Ruling Proof of Bribery Demand Essential in Corruption Cases

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Edited by Vaibhav Gupta

सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामलों में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि रिश्वत मांगने का स्पष्ट सबूत होना बेहद जरूरी है. कोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया है कि केवल रिश्वत की रकम बरामद होने भर से किसी सरकारी अधिकारी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता. जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने उत्तर सरकार की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए ये फैसला दिया है.

हाईकोर्ट के फैसला बरकरार

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7 और 13 के तहत दोष सिद्ध करने के लिए रिश्वत मांगने और उसे स्वीकार करने का प्रमाण अनिवार्य है. अदालत ने कहा कि यदि मांग का ठोस सबूत नहीं है, तो केवल पैसे की बरामदगी के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती. सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है.

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में कानून का बोझ अभियोजन पक्ष पर है और उसे रिश्वत मांगने का स्पष्ट व भरोसेमंद सबूत पेश करना होगा. अदालत ने ये भी दोहराया कि किसी आरोपी की केवल मौजूदगी या रिश्वत की रकम की बरामदगी, कानूनी रूप से दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा सकती.

क्या था मामला?

बता दें कि मामला 1995 का था. आरोप था कि केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग के अधिकारियों ने एक फैक्ट्री पर छापा मारकर दस्तावेज जब्त किए थे और उन्हें वापस करने के बदले 80 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी. इसके बाद सीबीआई ने ट्रैप लगाया और अधिकारी आर. के. श्रीवास्तव के घर से रकम बरामद की गई.

वहीं, सीबीआई के विशेष अदालत ने साल 2014 में अधिकारियों को दोषी ठहराया था, लेकिन 2019 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया. इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. जिसकी याचिका पर सुनवाई के दौरान बरी किए गए कथित आरोपी के वकील राजीव कुमार ने विरोध किया.

कोर्ट ने सभी पक्षों की जिरह के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए, राज्य सरकार की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है.

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-भारत एक्सप्रेस



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