Supreme court
सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी)को निर्देश दिया है कि तेलंगाना स्टेट मिनरल डेवलपमेंट कॉरर्पोरेशन की ओर से दायर याचिका पर जल्द फैसला लें. कॉरपोरेशन ने ट्रिब्यूनल से गाद निकालने के काम पर रोक लगाने वाले अंतरिम आदेशों को हटाने की मांग की है. यह याचिका 9 नवंबर 2025 से ही ट्रिब्यूनल के पास लंबित है.
मामले कजिया सुनवाई के दौरान कॉरपोरेशन की ओर से दलील दी गई कि संबंधित काम नियमित रखरखाव के तहत गाद निकालने का है. इसके लिए पर्यावरण मंजूरी की जरूरत नही है. साथ ही, बाढ़ के खतरे को कम करने और उसकी रोकथाम के लिहाज से काम जरूरी है. कोर्ट ने कहा कि एनजीटी को इस बात की जांच करनी चाहिए कि क्या संबंधित काम वास्तव में उस छूट के दायरे में आता है, जिसका दावा कॉर्पोरेशन कर रहा है. इसके बाद ट्रिब्यूनल को लंबित अर्जी पर जल्द निर्णय लेना चाहिए.
ट्रिब्यूनल के कामकाज पर वरिष्ठ वकील नाडकर्णी की टिप्पणी
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील नाडकर्णी ने ट्रिब्यूनल के कामकाज को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह इस बारे में ज्यादा कुछ खुलकर नहीं कहना चाहते. उन्होंने अदालत का ध्यान संबंधित आदेश की ओर भी दिलाया, जिसमें विवादित फैसले के अमल पर रोक लगाई गई थी और निकाले गए मटीरियल का पूरा हिसाब-किताब रखने का निर्देश दिया गया था.
नाडकर्णी ने आरोप लगाया है कि इस मामले में प्रतिद्वंद्वी टेंडरकर्ताओं की ओर से प्रॉक्सी लिटिगेशन की जा रही है. उनकी दलील थी कि इस तरह की कानूनी कार्यवाही के जरिए परियोजना के काम मे बाधा पैदा की जा रही है. बता दें कि एनजीटी ने पाया था कि TGMDC ठेकेदारों के माध्यम से करीब 43 लाख घन मीटर रेत/गाद निकाल रहा था, जिसके लिए आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरी नही ली गई थी.
कॉरपोरेशन का कहना है कि अगर जलाशयों से गाद नही हटाई गई, तो आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है. उनका दावा है कि पर्यावरण नियम के तहत गाद निकालने और डेजिंग के काम को पर्यावरणीय मंजूरी से छूट प्राप्त है.
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-भारत एक्सप्रेस
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