सुप्रीम कोर्ट.
Karnataka Dharmasthala Case: सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक में धर्मस्थल के मामले में निचली अदालत द्वारा दिए गए आदेश पर दोबारा र्विचार करने को कहा है. निचली अदालत ने मीडिया रिपोर्ट पर प्रतिबंध लगा दिया था. जिसपर हाई कोर्ट ने रोक लगा दिया था. जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने यह संकेत दिया है कि मामले में मीडिया रिपोर्टिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए या नही, इसमें कोर्ट को कुछ संदेह है.
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह पूरे मामले की नए सिरे से सुनवाई कर निष्पक्ष फैसला देने को कहा है. निचली अदालत ने मीडिया रिपोटिंग पर रोक लगा दिया था. साथ ही कोर्ट ने 390 मीडिया संस्थानों को धर्मस्थल दफन मामले से जुड़े लगभग 9000 लिंक और खबरें हटाने का निर्देश दिया था. जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के सलाह के बाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई.
ट्रायल कोर्ट को नए सिरे से सुनवाई का निर्देश
दायर याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया था. जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुचा है. बता दें कि डी हर्षेन्दर कुमार ने बेंगलुरु के अतिरिक्त सिटी सिविल और सत्र सत्र अदालत में मुकदमा दायर किया था. जिसमें 4140 यूट्यूब वीडियो, 932 फेसबुक पोस्ट, 3540 इंस्टाग्राम पोस्ट, 108 समाचार लेख 37 रेडिट पोस्ट 41 ट्वीट सहित 8842 लिंक को ब्लॉक करने की.मांग की थी.
उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया था कि मीडिया द्वारा दो जा रही जानकारी अपमानजनक और मानहानिकारक है. इससे उनके परिवार की छबि खराब हो रही है. जिसके बाद कोर्ट ने रोक लगा दिया था. यह मामला एक सफाई कर्मचारी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर से उत्पन्न हुआ है. जिसमें दावा किया गया कि उसे 1995 से 2014 के बीच धर्मस्थल गांव में महिलाओं और बच्चों के शवों को दफनाने का निर्देश दिया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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