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वक्फ संशोधित कानून 2025: सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं का निपटारा किया, 5 मई को होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधित कानून 2025 को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निपटारा किया. कोर्ट ने लंबित मामलों में हस्तक्षेप आवेदन दायर करने को कहा. 5 मई को सुनवाई होगी. केंद्र ने आरोप खारिज किए.

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Aarika Singh Edited by Aarika Singh

वक्फ संशोधित कानून 2025 को चुनौती देने वाली कुछ याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट ने निपटारा कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि जिन याचिकाओं पर सुनवाई तय की गई है. उन्हीं याचिकाओं में अर्जी दाखिल करें. सीजेआई संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकील से कहा कि वे लंबित पांच मामलों में हस्तक्षेप आवेदन दायर करें, जिनपर अंतरिम आदेश पारित करने के लिए 5 मई को सुनवाई होगी.

यह याचिका कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, वकील एम. एम कश्यप, फिरोज इकबाल खान, शाईक मुनीर अहमद, मुस्लिम एडवोकेट एसोसिएशन, पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, मोहम्मद हसनैन सिद्धकी, नासिर अजीज, मोहम्मद फाजिल अहमद, मोहम्मद राशिद अली,रहमतुल्लाह कोतवाल, ऑल रिलिजियस एफिनिटी मूवमेंट, इम्तियाज अहमद, ऑल इंडिया मुस्लिम विकास परिषद, सैयद मोहम्मद हमुदुल्लाह, इमारत शरीह, अर्जुन सिंह राजू, मोहम्मद बाजिद अमीन, तौसीफ अहमद, खाजा सईद शाह अब्दुल्ला  हुसैनी, मालदा मुतल्लवीस वेलफेयर एसोसिएशन, डेरेक ओ ब्रायन, मुहम्मद अब्दुल मतीन और डॉक्टर तस्लीमा अहमद ने दायर की थी.

तीन वकीलों को नोडल वकील नियुक्त किया था

बता दें कि सीजेआई ने तीन वकीलों को नोडल वकील नियुक्त किया था. कोर्ट ने वकीलों से आपस में तय करने कहा कि कौन बहस करने जा रहा है. कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं को सरकार के जवाब के पांच दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है. केंद्र सरकार ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है. केंद्र सरकार ने पिछले हफ्ते ही जवाब दाखिल कर वक्फ कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं में लगाए गए सभी आरोपों को खारिज कर दिया है. सरकार ने हलफनामा में कहा है कि वक्फ कानून 2025 से किसी भी तरह से संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं होता है.

सरकार ने याचिकाओं को खारिज करने की मांग की है. केंद्र ने अधिनियम के किसी भी प्रावधान पर रोक लगाने का विरोध करते हुए कहा कि कानून में यह स्थापित स्थिति है कि संवैधानिक अदालतें किसी वैधानिक प्रावधान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोक नहीं लगाएगी और मामले पर अंतिम रूप से निर्णय लेगी. सरकार ने हलफनामा में यह भी कहा है कि वक्फ बाय यूजर को वैधानिक संरक्षण से वंचित करने से मुस्लिम समुदाय के किसी व्यक्ति को वक्फ बनाने से वंचित नहीं किया जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस



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