सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) से संबंधित मामलों की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया है. साथ ही कोर्ट ने राज्यों की पुलिस को सीबीआई जांच में सहयोग करने का निर्देश जारी किया है. सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने रिजर्व बैंक को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट 2 सप्ताह बाद इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
सहमति पर हो व्यापक जांच
कोर्ट ने कहा कि जिन राज्यों ने सीबीआई को सहमति नहीं दी है, वे अपने अधिकार क्षेत्र में आईटी अधिनियम 2021 के अंतर्गत जांच के लिए सहमति प्रदान करें ताकि सीबीआई अखिल भारतीय स्तर पर व्यापक जांच कर सकें. कोर्ट ने कहा कि सीबीआई आवश्यकतानुसार इंटरपोल अधिकारियों से सहायता के लिए अनुरोध करेगी.
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी साफ कर दिया है कि अन्य प्रकार के घोटालों पर अगली सुनवाई में विचार करेगा. कोर्ट ने अपने आदेश में.साफ कर दिया है कि सीबीआई को पीसीए के तहत उन बैंकरों की जांच की पूरी छूट होगी, जहां ऐसे डिजिटल गिरफ्तारी घोटालों के लिए बैंक खाते खोले गए है.
सह-अभियुक्तों को रिहाई नहीं
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने 72 वर्षीय महिला वकील से डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) के जरिए ठगे गए 3.29 करोड़ रुपए के मामले में गिरफ्तार आरोपियों को जमानत नहीं देने को कहा था. कोर्ट ने कहा था कि संबंधित अदालतें आरोपियों को रिहाई का आदेश जारी न करें. कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि कोई भी अदालत आरोपी विजय खन्ना और अन्य सह- अभियुक्तों को रिहाई नहीं देगी.
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सीबीआई, केंद्र सरकार साइबर क्राइम अंबाला, हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए कहा था कि लोगों की जीवन भर की बचत से ठगी करने वाले बड़े सिंडिकेट का पता लगाने की जरूरत बताई है. कोर्ट ने कहा था कि बॉम्बे हाईकोर्ट में विभिन्न फर्जी कार्यवाहियों और सीबीआई, ईडी जांच के झूठे दावे सामने आए है.
हाई कोर्ट के नाम का दुरुपयोग चिंका का विषय
दस्तावेजों की जालसाजी और इस अदालत तथा हाई कोर्ट के नाम, मुहर और न्यायिक प्राधिकरण का बेशर्मी से आपराधिक दुरुपयोग गंभीर चिंता का विषय है. कोर्ट ने कहा था कि न्यायाधीशों के फर्जी हस्ताक्षरों वाले न्यायिक आदेश न्यायपालिका पर जन विश्वास प्रणाली की नींव पर प्रहार करते हैं.
कोर्ट ने कहा था कि यह मामला कोई अकेला मामला नहीं है. उन्होंने कहा था कि मीडिया में इस तरह की खबरे कई बार छपी है. सुप्रीम कोर्ट ने अंबाला में बुजुर्ग महिला से फर्जी आदेश दिखाकर ठगी की बात सामने आने के बाद स्वतः संज्ञान लिया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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