सुप्रीम कोर्ट प्रवासी मजदूरों से संबंधित मामले में सुनवाई के दौरान राशन कार्ड के हो रहे दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त की है. कोर्ट ने पूछा कि क्या राज्य दिखावे के लिए राशन कार्ड का इस्तेमाल कर रहे है? कोर्ट ने पूछा कि क्या वास्तविक बीपीएल (गरीबी रेखा के नीचे) परिवारों के लिए लाभ उन लोगों की जेब में जा रहे हैं, जो इसके हकदार नहीं है. कोर्ट ने कहा कि कई राज्य राशन प्रणाली के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को सब्सिडी वाली आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने का दावा करते हैं, लेकिन ऐसा राशन बीपीएल लक्षित लाभार्थी परिवारों तक नहीं पहुचता है.
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा कि राशन कार्ड का इस्तेमाल उन राज्यों द्वारा दिखावे के लिए किया जाता है जो दावा करते हैं कि उन्होंने इतने सारे राशन कार्ड जारी किए हैं. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमारी चिंता यह है कि क्या वास्तविक बीपीएल (परिवारों) के लिए लाभ उन लोगों तक पहुच रहे हैं जो इसके हकदार नही है? कोर्ट ने कहा कि राशन कार्ड अब लोकप्रियता कार्ड बन गया है. राज्य सरकारें यही कहती है कि हमने इतने बीपीएल कार्ड जारी किए है. कोर्ट ने यह भी कहा कि जब वे अपना विकास दिखाना चाहते हैं, तो वे कहते हैं प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही हैं और फिर जब हम बीपीएल की बात करते हैं, तो वे कहते है 75 प्रतिशत बीपीएल है.
कोर्ट ने पूछा इनका समाधान कैसे हो सकता हैं? संघर्ष अंतनिर्हित है. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह वास्तविक पात्र या जरूरतमंद लोगों तक पहुचे. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने मुफ्त राशन और अन्य फ्री योजनाओं को लेकर सवाल उठाया था. सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में पूछा था कि आखिर लोगों को फ्री की रेवड़ी कब तक बांटी जाएगी. कोरोना काल में प्रवासी मजदूरों को बांटी जाने वाला मुफ्त राशन तब समय की जरूरत था, लेकिन लोगों के लिए रोजगार के अवसर बनाने की जरूरत है. कोर्ट ने कहा था देश में 81 करोड़ लोगों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत मुफ्त और सब्सिडी का राशन दिए जाने पर हैरानी जताई थी.
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा था कि सरकार ने कोरोना महामारी के दौरान और इसके बाद गरीबों को मुफ्त राशन मुहैया कराया. हालांकि इस पर कोर्ट ने सवाल करते हुए कहा था कि इसका मतलब है कि सिर्फ टैक्सपेयर्स ही बाकी बचे है. वही याचिकाकर्ता की ओर से पेश प्रशांत भूषण ने कहा था कि ई श्रमिक पोर्टल पर पंजीकृत मजदूरों को मुफ्त राशन मिलना चाहिए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मुफ्त राशन देने के बजाए हमें इन मजदूरों के लिए रोजगार के अवसर, रोजगार और क्षमता निर्माण पर काम करें.
-भारत एक्सप्रेस
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