हत्या के कथित मामले में गिरफ्तार वकील विक्रम सिंह को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल राहत मिल गई है. कोर्ट ने 10 हजार रुपए के निजी मुचलके पर तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है. सीजेआई बी आर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनबी अंजारिया की पीठ ने हरियाणा सरकार, गुरुग्राम एसटीएफ और गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में जवाब देने को कहा है. साथ ही कोर्ट ने विक्रम सिंह को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश भी दिया हैं.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने कोर्ट को बताया कि आपराधिक मामलों में आरोपी का पक्ष रखने के कारण गुरुग्राम एसटीफ ने अवैध तरीके से गिरफ्तार कर रखा है. विक्रम सिंह ने हत्या के मामले में कई गई गिरफ्तारी को चुनौती दी हैं. दायर याचिका में कहा गया है कि 2021 से 2025 के बीच पेशेवर दायित्वों के तहत उन्होंने कई आपराधिक मामलों में आरोपियों की पैरवी की हैं, जिनमें से कुछ कथित संबंध कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग से जोड़ा गया. उन्होंने कहा कि वह इन मामलों की पैरवी पेशेवर कर्तव्य और आचार संहिता के अनुरूप ही कि गई.
STF के खिलाफ शिकायत दर्ज कराना पड़ा महंगा
दायर याचिका में यह भी कहा गया है कि एक अन्य मुवक्किल ज्योति प्रकाश उर्फ बाबा पर एसटीएफ हिरासत में की गई कथित मारपीट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद विक्रम सिंह को निशाना बनाया गया. याचिका में यह भी कहा गया है कि 31 अक्टूबर को गिरफ्तारी के दौरान न तो किसी लिखित आधार की जानकारी दी गई, न ही स्वतंत्र गवाह मौजूद थे, जो संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 22 का उल्लंघन हैं.
दायर याचिका में फरीदाबाद के सेक्टर-8 थाना में दर्ज एफआईआर सहित आईपीसी की धारा 302, 34 और आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत चल रही सभी कार्यवाहियों को रद्द करने की भी मांग की गई है. बता दें कि विक्रम सिंह के खिलाफ कार्रवाई से भड़के वकीलों के संघ ने 6 नवंबर को दिल्ली के सभी निचली अदालतों में काम का बहिष्कार किया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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