सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सरकार द्वारा एसआईआर को लेकर दायर याचिकाओं पर चुनाव आयोग से 2 सप्ताह में जवाब देने को कहा है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ 26 नवंबर को मामले में सुनवाई करेगी. कोर्ट ने देशभर के हाई कोर्ट्स से कहा है कि एसाईआर की वैधता से जुड़ी कार्यवाही पर तुरंत रोक दी जाए. कोर्ट ने कहा एसआईआर प्रक्रिया 12 राज्यों में चल रही हैं.
यह याचिका पश्चिम बंगाल कांग्रेस समिति की ओर से दायर की गई है. देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर लिस्ट का रिवीजन एसआईआर चार नवंबर से शुरू हो चुका है जिसका पश्चिम बंगाल में लगातार विरोध हो रहा है. उसके बावजूद बूथ लेवल अधिकारियों ने 3.04 करोड़ से ज्यादा फॉर्म बांट दिए हैं. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि जब तक राज्य हर नागरिक एसआईआर का फार्म नहीं भरता, वो खुद भी नही भरेंगी.
तमिलनाडु से बंगाल तक उठा विवाद
दूसरी ओर भाजपा का दावा है कि मतदाता सूची से लाखों फर्जी नाम कटने और अपना अल्पसंख्यक वोट बैंक बिखरने की आशंका से तृणमूल कांग्रेस डरी हुई हैं. इससे पहले डीएमके ने तमिलनाडु में चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर प्रक्रिया शुरू करने के फैसले की चुनौती दी हैं. यह याचिका डीएमके के संगठन सचिव आर एस भारती ने दायर की है. दायर याचिका पर चुनाव आयोग की 27 अक्टूबर की अधिसूचना को असंवैधानिक मनमाना और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है.
याचिका में कहा गया है कि एसआईआर प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 (समानता का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन का अधिकार) का उल्लंघन करती हैं. डीएमके का आरोप है कि यह प्रक्रिया लाखों वास्तविक मतदाताओं को मनमाने ढंग से मतदाता सूची से बाहर करने का कारण बन सकती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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