केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 14 अगस्त को सुनवाई करेगा. हालांकि पिछले दिनों वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सीजेआई बीआर गवई के समक्ष मेंशन कर कहा था कि यह मामला 8 अगस्त को सूचीबद्ध किया गया है. लिहाजा सूची से हटाया ना जाए. जिस अनुरोध को सीजेआई ने स्वीकार कर लिया था.
साल 2023 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए को हटाए जाने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने जम्मू कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को खत्म करने के सरकार के फैसले को सही माना था. यह याचिका कॉलेज टीचर जहूर अहमद भट्ट और एक्टिविस्ट खुर्शीद अहमद मलिक ने दायर की है. याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार को निर्देश दे कि वह दो महीने की समयसीमा में जम्मू कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करें.
सुप्रीम कोर्ट ने पूछा सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा था कि अपना रुख स्पष्ट करें. जिसपर सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को भरोसा दिया था कि जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा. लेकिन केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के 11 महीने बाद भी पूर्व राज्य का दर्जा को लेकर कोई कदम नही उठाया गया है.
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया था कि जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला स्थायी नहीं है. एसजी तुषार मेहता ने कहा था कि जब जम्मू कश्मीर के हालात सामान्य होंगे तो फिर राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा. साल 2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए को हटाकर इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया था.
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-भारत एक्सप्रेस
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