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‘PM के खिलाफ नहीं जा सकता मंत्री…’ चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, 2023 के कानून पर उठे सवाल

Election Commissioner appointment process: पूर्व आईएएस एसएन शुक्ला और अन्य याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को ‘एकतरफा’ बताते हुए कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें कैबिनेट मंत्री और पीएम की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं.

SUPREME COURT
Edited by Shubhra Rai

Chief Election Commissioner: देश के मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पूर्व आईएएस अधिकारी एसएन शुक्ला ने कहा कि विधानमंडल ने बिना सोचे-समझे संशोधन को मंजूरी दे दी. मंत्री की अध्यक्षता वाली खोज समिति एकतरफा है, क्योंकि अन्य सदस्यों को भी मंत्री द्वारा ही मनोनीत किया जाता है.

उन्होंने कहा कि राजनीतिक निष्पक्षता से समझौता किया गया है. चयन समिति भी एक तरफा है.

प्रधानमंत्री के खिलाफ जा ही नहीं सकता

विपक्ष ने नेता को शामिल करना मात्र निर्रथक है, क्योंकि उनकी राय को नजरअंदाज किया जा सकता है. यह केवल नाममात्र की समिति है. जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा है कि एक कैबिनेट मंत्री प्रधानमंत्री के खिलाफ जा ही नहीं सकता है. ऐसे में सभी नियुक्तियों पर फैसला जाहिर तौर पर दो तिहाई के बहुमत से ही होगा.

300 से अधिक पन्नों में की गई टिप्पणियां

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि जब देश के सीजेआई सीबीआई निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होते हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य आयुक्तों की नियुक्ति के लिए भी एक स्वतंत्र प्रक्रिया क्यों नहीं हो सकती है? क्योंकि यह भी बहुत अधिक महत्वपूर्ण है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि कोर्ट संसद को कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकता.

उन्होंने कहा क्या 300 से अधिक पन्नों में की गई टिप्पणियां केवल उस व्यवस्था को सही ठहराने के लिए नहीं थी, जिसे अदालत ने कानून बनाने तक अस्थायी रूप से लागू किया था? क्या आप कह सकते हैं कि बनने वाला कानून भी इन्ही टिप्पणियों का पालन करें.

कोई कानूनी व्यवस्था मौजूद नहीं

उन्होंने कहा कि जब अदालत ने यह कह दिया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त का चयन केवल कार्यपालिका द्वारा नहीं होना चाहिए, तो वह वहीं क्यों रुक गई? अदालत ने मानक तय किए, फिर उन्हें सिर्फ कानून बनने की एक निश्चित अवधि तक ही क्यों सीमित किया? इस फैसले को साधारण रूप से पढ़ने पर स्पष्ट होता है कि यह केवल उस स्थिति से निपटने के लिए था, जहां कोई कानूनी व्यवस्था मौजूद नहीं थी.

केंद्र सरकार के 2023 के उस कानून को चुनौती

यह याचिका कांग्रेस नेता डॉक्टर जया ठाकुर सहित अन्य की ओर से दायर की गई है. दायर याचिका में केंद्र सरकार के 2023 के उस कानून को चुनौती दी है, जिसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश को बाहर कर दिया गया है. नए कानून के मुताबिक इस चयन समिति में प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होंगे.

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-भारत एक्सप्रेस 



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